
यूरोप के बाजार में भारत ने ऐसी एंट्री मारी है, जिसने दक्षिण एशिया और मिडिल ईस्ट के कई देशों की नींद उड़ा दी है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को सिर्फ एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि ग्लोबल टेक्सटाइल और गारमेंट्स इंडस्ट्री का गेम चेंजर माना जा रहा है। इस डील के बाद जहां भारतीय उद्योग जगत में उत्साह है, वहीं बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों में चिंता गहराने लगी है।
जीरो ड्यूटी से भारत को बड़ी बढ़त
इस एफटीए के बाद भारतीय कपड़े और टेक्सटाइल उत्पाद यूरोप में बिना कोई टैक्स दिए बेचे जा सकेंगे। इससे भारतीय सामान सस्ता पड़ेगा और उसकी मांग बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि भारत अब यूरोप के बाजार में बांग्लादेश, तुर्की और वियतनाम जैसे देशों को कड़ी टक्कर दे पाएगा। उद्योग के अनुमान बताते हैं कि एफटीए लागू होने के बाद इंडियन गारमेंट एक्सपर्ट में हर साल 20 से 25 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है, जबकि फिलहाल ईयू में भारत की ग्रोथ बेहद सीमित रही है।
बांग्लादेश के लिए क्यों है खतरे की घंटी?
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक रेडीमेड गारमेंट्स पर निर्भर है। उसके कुल निर्यात का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा कपड़ा और परिधान सेक्टर से आता है, जबकि ईयू उसका सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में भारत को जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलने से बांग्लादेश की बाजार हिस्सेदारी पर सीधा असर पड़ सकता है। टैरिफ हटते ही भारतीय कंपनियां बेहतर क्वालिटी, डिजाइन और टिकाऊ उत्पादों के दम पर बांग्लादेश को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में आ जाएंगी।
तुर्की की चुनौती भी बढ़ी
तुर्की अब तक यूरोप को तेजी से डिलीवरी और भौगोलिक नजदीकी का फायदा देता रहा है। लेकिन भारत की मजबूत सप्लाई चेन, विशाल उत्पादन क्षमता और अब शुल्क-मुक्त पहुंच तुर्की के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकती है।
भारतीय उद्योग के लिए सुनहरा मौका
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को केवल सस्ता उत्पादक ही नहीं, बल्कि क्वालिटी और सस्टेनेबिलिटी आधारित सप्लायर के रूप में स्थापित करेगा। इससे निवेश बढ़ेगा, उत्पादन क्षमता का विस्तार होगा और लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।


