Tuesday, January 27, 2026
HomeBreaking NewsUGC बिल पर नीतीश कुमार की JDU ने साफ किया रुख, 'समाज...

UGC बिल पर नीतीश कुमार की JDU ने साफ किया रुख, ‘समाज के किसी तबके में…’


यूजीसी बिल 2026 पर नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का रुख सामने आया है. पार्टी के प्रवक्ता और एमलसी नीरज कुमार ने कहा कि डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने इस देश के अंदर संविधान बनाया है. संविधान में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है. ऐसी स्थिति में समाज के किसी भी तबके में कोई उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न्याय के साथ सबका विकास और सबका सम्मान के रोल मॉडल हैं. यूजीसी का जो नया रेगुलेशन आया है, उस संबंध में तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं. अब इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. न्यायपालिका का सम्मान तो सब करते हैं तो अब न्यायपालिका का फैसला ही सबके लिए महत्वपूर्ण होगा.

यूजीसी की नई गाइडलाइंस का क्यों हो रहा है विरोध

  • UGC Equity Regulations 2026 इसी महीने लागू हुआ है
  • OBC वर्ग को जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया
  • झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर जुर्माना या निलंबन जैसे प्रावधान हटे
  • सामान्य वर्ग के मुताबिक, कानून का दुरुपयोग उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है
  • दावा है कि गलत शिकायत दर्ज कराने वाले को किसी दंड का डर नहीं होगा

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

यूजीसी की नई गाडलाइंस ने यूपी का सियासी पारा बढ़ा दिया है. बीजेपी के कई पदाधिकारियों ने इसको लेकर इस्तीफा तक दे दिया. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया कि जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और संस्थागत सुरक्षा से कुछ श्रेणियों को बाहर कर दिया गया है.

कोर्ट से रोक लगाने की मांग

सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि इसके मौजूदा स्वरूप में लागू करने से रोका जाए और जाति-आधारित भेदभाव को ‘जाति-तटस्थ और संविधान अनुरूप’ तरीके से फिर से परिभाषित किया जाए. इसमें कहा गया है, “जाति के आधार पर भेदभाव को इस तरह से परिभाषित किया जाना चाहिए कि जाति के आधार पर भेदभाव का शिकार होने वाले सभी लोगों को सुरक्षा मिले, चाहे उनकी जाति की पहचान कुछ भी हो.”  याचिका में केंद्र सरकार और यूजीसी को अंतरिम निर्देश देने की मांग की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन नियमों के तहत बनाए गए ‘समान अवसर केंद्र’ और ‘समानता हेल्पलाइन’ आदि को बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध कराया जाए.



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments