Friday, January 23, 2026
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कनाडाई PM के बयान से नाराज हुए ट्रम्प:गाजा पीस बोर्ड का न्योता छीना, कार्नी ने कहा था- अमेरिकी दबदबे वाली दुनिया खत्म हुई




अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के एक बयान से नाराज हो गए हैं। उन्होंने कार्नी से गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता वापस ले लिया। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। दरअसल कार्नी ने 20 जनवरी को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा था कि अमेरिका के दबदबे वाली वैश्विक व्यवस्था अब खत्म हो चुकी है। ट्रम्प बोले- अमेरिका की वजह से कनाडा चल रहा कार्नी के बयान के अगले दिन 21 जनवरी को ट्रम्प ने दावोस में उन्हें खरी-खोटी सुनाई। ट्रम्प ने कहा कि कनाडा को अमेरिका से बहुत कुछ मुफ्त में मिलता है। उन्हें इसके लिए अमेरिका का आभारी होना चाहिए, लेकिन वह नहीं है। ट्रम्प ने कहा कि “कनाडा, अमेरिका की वजह से ही टिका हुआ है। कनाडाई पीएम अगली बार बयान देते वक्त यह बात याद रखें।” इसके जवाब में कार्नी ने गुरुवार को ट्रम्प के दावे को गलत बताया। कार्नी ने कहा था- टैरिफ को हथियार बनाया जा रहा मार्क कार्नी ने दावोस में कहा कि दुनिया किसी बदलाव की तरफ नहीं, बल्कि टूटने की तरफ आगे बढ़ रही है। कार्नी ने कहा- “हाल के वर्षों में आर्थिक और राजनीतिक संकटों ने दिखा दिया है कि देशों की ज्यादा वैश्विक निर्भरता उन्हें जोखिम में डाल सकती है।” कार्नी ने अमेरिकी टैरिफ नीति को भी गलत बताया था। उन्होंने कहा, “बड़े देश अब इन्हें हथियार की तरह इस्तेमाल करके दबाव डाल रहे हैं, जिससे कमजोर देशों को मजबूर किया जा रहा है। कार्नी ने कनाडा के घरेलू संसाधनों और क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि हमें किसी एक देश पर निर्भरता कम करनी होगी। कार्नी ने कहा था जो देश खुद को खिला नहीं सकता, ऊर्जा नहीं दे सकता और अपनी रक्षा नहीं कर सकता, उसके पास बहुत कम विकल्प होते हैं। पहले भी आमने-सामने आ चुके ट्रम्प-कार्नी मार्क कार्नी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच बढ़ता तनाव नया नहीं है। पहले भी दोनों नेता कई मुद्दों पर आमने-सामने आ चुके हैं। पिछले हफ्ते ग्रीनलैंड को लेकर कार्नी ने ट्रम्प को खुली चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला अमेरिका नहीं कर सकता और यह अधिकार केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क का है। कार्नी ने उस समय अमेरिका समेत नाटो के सभी सहयोगी देशों से अपनी जिम्मेदारियों का सम्मान करने की अपील की थी और साफ किया था कि कनाडा डेनमार्क की संप्रभुता के साथ खड़ा है। कार्नी ने ट्रम्प से कहा था- कनाडा बिकाऊ नहीं है कार्नी ने पिछले साल मई में ट्रम्प से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। इस दौरान कार्नी ने ट्रम्प से साफ शब्दों में कहा था कि कनाडा बिकाऊ नहीं है। यह बयान उन्होंने ओवल ऑफिस में ट्रम्प के साथ हुई बैठक के दौरान दिया था। दरअसल, बैठक के दौरान ट्रम्प ने कहा कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए। ट्रम्प का तर्क था कि अगर कनाडा अमेरिका में शामिल होता है तो वहां के लोगों को कम टैक्स, बेहतर सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इस पर कार्नी ने ट्रम्प को जवाब देते हुए कहा कि जैसे रियल एस्टेट में कुछ जगहें कभी बिक्री के लिए नहीं होतीं, वैसे ही कनाडा भी कभी बिकाऊ नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस इमारत में वे बैठे हैं या बकिंघम पैलेस जैसी जगहें कभी नहीं बेची जातीं, उसी तरह कनाडा भी न कभी बिकेगा और न कभी बेचा जाएगा। कार्नी ने यह भी कहा था कि कनाडावासियों की सोच इस मुद्दे पर नहीं बदलेगी और कनाडा कभी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा। कार्नी ने ट्रम्प के बयानों को चुनावी मुद्दा बनाया था ट्रम्प के कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने वाले बयानों को कार्नी ने अप्रैल 2025 में अपने चुनाव अभियान में एक बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया था। कार्नी ने इन्हें देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सम्मान को चुनावी मुद्दा बना दिया था। चुनाव प्रचार के दौरान कार्नी ने कई बार कहा था कि कनाडा किसी भी विदेशी दबाव के आगे देश नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार अमेरिका के सामने मजबूती से खड़ी रहेगी और कनाडा की पहचान से कोई समझौता नहीं करेगी। ट्रम्प के इन बयानों ने कनाडा की राजनीति में हलचल मचा दी थी। इसी माहौल में कार्नी ने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश किया, जो बाहरी दबावों का खुलकर विरोध कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इससे कार्नी को उन मतदाताओं का समर्थन मिला, जो देश की स्वतंत्र नीति और संप्रभुता को लेकर चिंतित थे। जानकारों का मानना है कि ट्रम्प के बयानों के खिलाफ सख्त रुख और राष्ट्रीय भावना को सामने रखना उनकी चुनावी जीत की एक बड़ी वजह बना। ट्रम्प ने बोर्ड ऑफ पीस लॉन्च किया, भारत और यूरोपीय देश नहीं पहुंचे ट्रम्प ने गुरुवार को दावोस में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लॉन्च किया। व्हाइट हाउस ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए 60 देशों को न्योता भेजा था, लेकिन सिर्फ 20 देश ही हस्ताक्षर समारोह में मौजूद रहे। ट्रम्प के बनाए गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में 8 इस्लामिक देशों ने शामिल होने पर सहमति जताई है। इन देशों में कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। भारत से कोई हस्ताक्षर समारोह में शामिल नहीं हुआ। वहीं अमेरिका के सहयोगी माने जाने वाले ज्यादातर यूरोपीय देश भी इस समारोह से गायब रहे। गाजा बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रम्प ने पहली बार पिछले साल सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। पिछले हफ्ते दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा। भेजे गए एक मसौदा (चार्टर) में कहा है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। ————————————— गाजा पीस बोर्ड से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के गाजा पीस बोर्ड को लेकर घिरे पाकिस्तानी PM: सदस्यता लेने पर विपक्ष बोला- जल्दबाजी में कदम उठाया; यह अमीरों का क्लब बन रहा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को दावोस में अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के चार्टर पर साइन किए हैं। इस बोर्ड को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अगुवाई में गाजा के सीजफायर को मजबूत करने के लिए बनाया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…



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