Wednesday, January 21, 2026
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अखिलेश और सीएम योगी का नाम लेकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कर दिया बड़ा दावा, पूछा- पीड़ा नहीं हो रही?


उत्तर प्रदेश स्थित प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेकर बड़ा दावा कर दिया है. इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने 21 जनवरी, बुधवार को कहा कि यदि इसी तरह अपमान होता रहा, मारा-पीटा जाएगा और संतों को अपमानित किया जाएगा तो यह कोई अच्छी स्थिति नहीं है. इसलिए इसके खिलाफ संघर्ष आवश्यक है, ताकि आगे से कोई भी शासन-प्रशासन ऐसी गलती न करे.

उन्होंने कहा कि जब कोई जान-बूझकर जनता में भ्रम फैलाता है तो ऐसी परिस्थितियों में विरोध करना पड़ता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे न अनशन पर हैं और न ही धरने पर, बल्कि ससम्मान स्नान की अनुमति मिलने तक शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि वे गंगा-जमुना का बहिष्कार नहीं कर सकते और न ही करेंगे, लेकिन जब अपमान को सम्मान में बदला जाएगा तभी वे शिविर में लौटेंगे. यह किसी के मानने या न मानने का प्रश्न नहीं है और न ही कोई यह तय करने वाला है कि उन्हें शंकराचार्य कौन बनाए.

शंकराचार्य ने क्यों लिया अखिलेश और सीएम का नाम?

उन्होंने दो टूक कहा कि ससम्मान स्नान होगा तभी वापसी होगी. शंकराचार्य ने सवाल उठाया कि अगर अखिलेश यादव फोन कर सकते हैं तो योगी आदित्यनाथ फोन क्यों नहीं करते और भाजपा नेताओं को पीड़ा क्यों नहीं हो रही, जबकि वे स्वयं को हिंदुओं का बड़ा हितैषी बताते हैं.

उन्होंने कहा कि वे जो भी कहते हैं उसके पीछे कारण बताते हैं, लेकिन जब राजनेता धर्म की बात करते हैं तो वह स्वीकार्य होता है और जब शंकराचार्य बोलते हैं तो उसे गलत ठहराया जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग माफी नहीं मांगेंगे, उन्हें अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ेगा, क्योंकि वे स्वयं कुछ नहीं करेंगे, बल्कि कर्म का फल अपने आप भोगना पड़ता है.

हम सहयोग करने को तैयार थे- शंकराचार्य

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यही उनका स्थायी पता है और यहीं पर हर वर्ष उनका शिविर लगता है, त्रिवेणी मार्ग उनके लिए आरक्षित रहता है. उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित लोग अपमान करने में विश्वास रख रहे थे और उनके पास इसकी रिकॉर्डिंग भी मौजूद है. उनका कहना था कि यदि वे इसे मुद्दा बनाना चाहते थे तो इसमें उनकी क्या भूमिका है. शं

कराचार्य ने स्पष्ट किया कि वे शुरू से सहयोग करने के लिए तैयार थे, लेकिन बार-बार उनका अपमान किया जाता रहा. उन्होंने यह भी कहा कि पूरी योजना पहले से बनाई गई होगी, क्योंकि घटनाक्रम जिस तरह से आगे बढ़ा, उससे साफ है कि यह सब अचानक नहीं हुआ, बल्कि सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया.



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