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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि अमेरिका के दबदबे वाली वैश्विक व्यवस्था अब खत्म हो चुकी है। उन्होंने मंगलवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में हो रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में यह बात कही। उन्होंने कहा, “दुनिया किसी बदलाव की तरफ नहीं, बल्कि टूटने की तरफ आगे बढ़ रही है। अब पुराना सिस्टम लौटने वाला नहीं है।” कार्नी ने कहा कि नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के हिसाब से चलने वाली दुनिया की जो बात की जाती है, वह असल में कभी भी पूरी तरह सच नहीं रही। दुनिया हमेशा से ताकत और अपने-अपने हितों के हिसाब से चली है। कार्नी ने माना कि पुराने वैश्विक सिस्टम से कनाडा को फायदा हुआ। लेकिन उनके मुताबिक अब यह व्यवस्था टिकाऊ नहीं रह गई है। कार्नी बोले- टैरिफ को हथियार बनाया जा रहा कार्नी ने कहा कि नई हकीकत यह है कि ताकतवर देश अपने हित साधने के लिए आर्थिक रिश्तों का इस्तेमाल दबाव बनाने में कर रहे हैं। उनके मुताबिक, टैरिफ को हथियार बनाकर दबाव बनाया जा रहा है, वित्तीय सिस्टम के जरिए देशों को मजबूर किया जा रहा है और सप्लाई चेन की कमजोरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कार्नी ने कहा कि हाल के वर्षों में आए आर्थिक और राजनीतिक संकटों ने यह दिखा दिया है कि जरूरत से ज्यादा वैश्विक निर्भरता किसी भी देश के लिए खतरनाक हो सकती है। कनाडा के लिए रणनीति बदलना जरूरी कार्नी ने चेतावनी दी कि अब यह मान लेना गलत है कि सिर्फ पुराने गठबंधन ही सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी हैं। उन्होंने कहा, “जब आपसी जुड़ाव ही आपको दूसरे के दबाव में ले आए, तो आप आपसी फायदे के झूठ में नहीं रह सकते।” कार्नी ने कहा कि कनाडा को उस नीति पर चलना होगा, जो सिद्धांतों पर भी टिकी हो और जमीन पर काम भी करे। इसके तहत घरेलू क्षमताएं मजबूत करने और किसी एक देश पर निर्भरता घटाने के लिए व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने पर जोर दिया। वैश्विक संस्थाएं कमजोर पड़ी, देश खुद तैयार रहे कार्नी ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन और संयुक्त राष्ट्र जैसी बहुपक्षीय संस्थाएं कमजोर पड़ी हैं। ऐसे में देशों को अब खुद अपनी सुरक्षा, ऊर्जा और खाद्य जरूरतों के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा, “जो देश खुद को खिला नहीं सकता, ऊर्जा नहीं दे सकता और अपनी रक्षा नहीं कर सकता, उसके पास बहुत कम विकल्प होते हैं।” फ्रांस ने भी ताकतवर देशों की आलोचना की थी इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी मंगलवार को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक की संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून कुचले जा रहे हैं और ताकतवर की ही चल रही है। मैक्रों ने कहा कि ऐसी दुनिया खतरनाक है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून की कोई अहमियत नहीं रह जाती। जहां ताकतवर देश जो चाहें करते हैं और कमजोर देशों को मजबूरी में सब सहना पड़ता है। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसकी व्यापार नीतियां यूरोप को कमजोर करने और क्षेत्रीय संप्रभुता के खिलाफ काम करी हैं। मैक्रों ने कहा कि आज दुनिया अस्थिर होती जा रही है। सुरक्षा के मामले में भी और अर्थव्यवस्था के मामले में भी। उन्होंने कहा कि 2024 में दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं और कई देशों में लोकतंत्र कमजोर होकर तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 क्यों खास है वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 का आयोजन 19 से 23 जनवरी तक स्विट्जरलैंड के दावोस में हो रहा है। इस साल की बैठक का थीम है ‘A Spirit of Dialogue’ यानी ‘संवाद की भावना’। इस बैठक में 130 से ज्यादा देशों के करीब 3,000 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इनमें 60 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, G7 देशों के नेता, करीब 850 बड़े CEOs और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख शामिल हैं। इस साल WEF की चर्चा इसलिए ज्यादा है क्योंकि दुनिया एक साथ कई संकटों से गुजर रही है। युद्ध, टैरिफ वॉर, वैश्विक मंदी की आशंका, जलवायु संकट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे तकनीकी बदलावों ने सरकारों और कंपनियों दोनों को नए फैसले लेने पर मजबूर कर दिया है। दावोस को इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि यहां होने वाली बातचीत और बैठकों का असर आने वाले सालों की वैश्विक नीति और बाजारों पर साफ दिखाई देता है। भारत और ग्लोबल साउथ देशों के लिए भी यह मंच बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां निवेश, सप्लाई चेन और विकास से जुड़े बड़े फैसलों पर चर्चा होती है। दावोस में भारत की बढ़ती मौजूदगी यह दिखाती है कि वैश्विक ताकत का संतुलन धीरे-धीरे बदल रहा है।
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कनाडाई पीएम बोले- अमेरिकी दबदबे वाली व्यवस्था का अंत हुआ:पुराना सिस्टम अब वापस नहीं आएगा; टैरिफ को हथियार बनाने का आरोप लगाया
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