इस साल का गणतंत्र दिवस भारत के लिए कई मायनों में खास और ऐतिहासिक रहने वाला है. एक ओर यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन भारत की गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि होंगी, वहीं दूसरी ओर भारतीय सेना की कुछ ऐसी टुकड़ियां पहली बार या लंबे अंतराल के बाद परेड का हिस्सा बनेंगी, जो देश की सैन्य ताकत और रणनीतिक क्षमता का नया स्वरूप दुनिया के सामने रखेंगी. गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि भारत की शक्ति, तकनीक, परंपरा और भविष्य की झलक होती है. इस बार यह झलक और भी खास होने वाली है.
भारत-चीन सीमा की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर दुर्गम मौसम में रसद और ईंधन पहुंचाने वाले डबल हम्प ऊँट हों या दुश्मन के ड्रोन को पलक झपकते ही मार गिराने वाले शिकारी पक्षी ये सभी इस बार पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में नजर आएंगे. भारतीय सेना के रिमाउंट वेटरनरी कॉर्प्स के कंटीजेंट के रूप में ये साइलेंट वॉरियर्स राजपथ पर कदम रखेंगे. इस कंटीजेंट में दो डबल हम्प ऊंट शामिल हैं, जिनका नाम नुब्रा और गलवान रखा गया है. इनके साथ सेना के 22 डॉग्स, चार रैप्टर बर्ड्स और चार ज़ांस्कर पोनीज़ भी परेड का हिस्सा होंगे. अब तक परेड में केवल आर्मी डॉग्स ही नजर आते थे, लेकिन इस बार साइलेंट वॉरियर्स की पूरी ताकत दिखाई देगी.
ड्रोन किलर रैप्टर बर्ड्स: करन और अर्जुन
इस बार परेड में सबसे ज्यादा चर्चा में साइलेंट वॉरियर्स हैं रैप्टर बर्ड्स करन और अर्जुन रहने वाले. ये पक्षी दुश्मन के जासूसी ड्रोन को बेहद कम समय में नष्ट कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर दुश्मन के ठिकानों की निगरानी में भी अहम भूमिका निभाते हैं. आधुनिक युद्ध में तकनीक के साथ प्राकृतिक क्षमता के इस मेल ने भारतीय सेना को एक अलग बढ़त दी है.
भैरव बटालियन का वैश्विक आगाज
‘अदृश्य और अदम्य’ सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि भारतीय सेना की नई स्पेशल यूनिट भैरव बटालियन की पहचान है. भगवान शिव के भैरव रूप से प्रेरित और नाग वासुकि इनसिग्निया वाली यह यूनिट काउंटर टेररिज्म और कोवर्ट ऑपरेशन्स में बेहद तेज और प्रभावी मानी जाती है. गणतंत्र दिवस परेड के मंच से भैरव बटालियन पहली बार दुनिया के सामने अपना औपचारिक और वैश्विक परिचय देगी. इसकी मौजूदगी यह संदेश देगी कि भारत अब सिर्फ रक्षा नहीं, बल्कि रणनीतिक आक्रमण क्षमता में भी पूरी तरह सक्षम है.
शौर्य और परंपरा की जीवंत कहानी: राजपूत रेजिमेंट
‘हो सर्वत्र विजय’सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट के साहस, बलिदान और गौरव की पहचान है. गणतंत्र दिवस परेड में शामिल यह दल अपने गीतों और मार्च के जरिए रणभूमि की वही गाथा सुनाएगा, जिसे राजपूत रेजिमेंट ने दशकों से जिया है. भीषण ठंड में भी मुस्कुराते हुए सीमा की रक्षा करने वाले सैनिकों की यह झलक परेड को भावनात्मक और प्रेरक बनाएगी.
8 साल बाद लौटेगी आर्टिलरी यूनिट, गॉड ऑफ वॉर
भारतीय सेना की आर्टिलरी यूनिट, जिसे ‘गॉड ऑफ वॉर’ और ‘किंग ऑफ बैटल’ कहा जाता है, आठ साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बनेगी. 1965 और 1971 के युद्ध में एम-46 गन, कारगिल युद्ध में बोफोर्स और हालिया अभियानों में एम-777 होविट्ज़र और ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए दुश्मन को करारा जवाब देने वाली यह यूनिट भारत की फायर पावर का प्रतीक है.
परेड से दुनिया को संदेश
इस बार की गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ सैन्य प्रदर्शन नहीं होगी, बल्कि यह संदेश देगी कि भारत तकनीक, परंपरा और रणनीतिक सोच के मामले में एक साथ आगे बढ़ रहा है. साइलेंट वॉरियर्स से लेकर स्पेशल यूनिट्स और सीमाओं पर तैनात गॉड ऑफ वॉर तक, राजपथ पर उतरेगा नया भारत आत्मनिर्भर, सशक्त और पूरी तरह तैयार.
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