आज भारत में UPI सिर्फ एक payment system नहीं, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। चाय वाले से लेकर बड़े malls तक हर जगह एक ही आवाज़ सुनाई देती है – “UPI है ना!” Digital India की इस सबसे बड़ी कामयाबी ने cash और cards को लगभग पीछे छोड़ दिया है। लेकिन इस चमकती success story के पीछे एक बड़ा और गंभीर सवाल छुपा है – क्या UPI हमेशा free रह सकता है? सच्चाई यह है कि हर UPI transaction को process करने में करीब ₹2 का खर्च आता है, जिसे अभी banks और fintech कंपनियां खुद उठा रही हैं। Merchant से कोई fee नहीं ली जाती, जिससे adoption तो बढ़ा, लेकिन system financially sustainable नहीं रह गया। Government incentives भी लगातार घट रहे हैं। जहां FY24 में ₹3,900 करोड़ का support था, वहीं अब यह सिमटकर सिर्फ ₹427 करोड़ रह गया है। RBI Governor भी साफ कह चुके हैं कि UPI हमेशा free नहीं रह सकता। Irony ये है कि रिकॉर्ड usage के बावजूद system को चलाने के लिए पैसे की कमी है। Industry का सुझाव है – छोटे merchants के लिए UPI free रहे, लेकिन बड़े merchants पर controlled charge लगे। अब सबकी नज़र Union Budget 2026 पर है। अगर समाधान नहीं निकला, तो UPI की growth धीमी पड़ सकती है।


