
भारत के चीन को निर्यात में दिसंबर 2025 में शानदार 67.35 प्रतिशत की तेज़ वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कुल निर्यात मूल्य 2.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह उछाल मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पादों और अन्य प्रमुख वस्तुओं के निर्यात में मजबूत बढ़ोतरी के कारण हुआ। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस विकास पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह एक स्वागतयोग्य वृद्धि है।
प्रमुख उत्पाद जिन्होंने निर्यात को बढ़ावा दिया
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र: पॉप्युलेटेड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), फ्लैट पैनल डिस्प्ले मॉड्यूल, टेलीफोनी से जुड़े विद्युत उपकरण और अन्य टेलीकॉम उपकरण।
कृषि एवं समुद्री उत्पाद: सूखी मिर्च, ब्लैक टाइगर झींगा, वन्नामेई झींगा, मूंग (ग्रीन ग्राम), ऑयल मील्स/ऑयल-केक अवशेष।
अन्य: मसाले, एल्युमिनियम और रिफाइंड कॉपर बिलेट्स।
अप्रैल-दिसंबर 2025-26 के आंकड़े
चीन को कुल निर्यात: 36.7% बढ़कर 14.24 अरब डॉलर।
चीन से आयात: 13.46% बढ़कर 95.95 अरब डॉलर।
व्यापार घाटा: 81.71 अरब डॉलर (भारत के पक्ष में अभी भी बड़ा असंतुलन)।
भारत-चीन व्यापार का संदर्भ
चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है (अमेरिका के बाद)। हाल के वर्षों में भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम उत्पादों और कृषि-समुद्री उत्पादों में चीन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की है, लेकिन आयात की तुलना में निर्यात अभी भी काफी कम है, जिससे व्यापार घाटा लगातार बड़ा होता जा रहा है। यह तेज निर्यात वृद्धि मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और समुद्री उत्पादों जैसे क्षेत्रों में यह गति जारी रही तो आने वाले महीनों में निर्यात और मजबूत हो सकता है।
वाणिज्य मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, चीन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात बाजार के रूप में लगातार उभरता जा रहा है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से नवंबर के बीच चीन को भारत का निर्यात 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 12.22 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। यह बढ़त भारत–चीन द्विपक्षीय व्यापार में हो रहे एक संरचनात्मक बदलाव की ओर इशारा करती है, जहां चीन के साथ व्यापार संबंधों में निर्यात की भूमिका धीरे-धीरे मजबूत होती दिख रही है।


