Wednesday, January 14, 2026
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80 साल के डॉक्टर से 15 करोड़ की ठगी! 17 दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट, 700 बैंक अकाउंट में घुमाए गए पैसे


दिल्ली पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड मामले में अहम कामयाबी हासिल की है. पुलिस ने बुजुर्ग डॉक्टर दंपती से ठगे गए 14 करोड़ 85 लाख रुपये में से करीब 1.90 करोड़ रुपये फ्रीज कर लिए हैं. यह ठगी डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर की गई थी.

इस स्कैम में पीड़ितों को फोन और वीडियो कॉल पर उन्हें डराकर घर से बाहर न निकलने और किसी से बात न करने को मजबूर किया जाता है.

डॉक्टर दंपती को डिजिटल तरीके से घर में किया गया कैद

इस मामले में साउथ दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाले 81 साल के डॉक्टर ओम तनेजा और उनकी 77 साल की पत्नी डॉक्टर इंदिरा तनेजा को निशाना बनाया गया. 24 दिसंबर से 9 जनवरी तक दोनों को लगातार फोन कॉल और वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा गया. 

ठगों ने खुद को टेलीकॉम कंपनी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताया और कहा कि उनके नाम पर फर्जी गतिविधियां पकड़ी गई हैं. गिरफ्तारी और केस की धमकी देकर उनसे बार-बार पैसे ट्रांसफर कराए गए.

700 से बैंक अकाउंट में भेजी गई रकम

पुलिस जांच में पता चला है कि ठगी की रकम को छिपाने के लिए जालसाजों ने 700 से ज्यादा म्यूल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया. सबसे पहले पैसे गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तराखंड के सात प्राइमरी अकाउंट में भेजे गए. 

इसके बाद इन खातों से रकम को तेजी से 200 से 300 अन्य खातों में घुमाया गया, ताकि पुलिस को असली रास्ता पता न चले.

गुवाहाटी से लेकर गुजरात तक किए गए पैसे ट्रांसफर 

दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया कि 26 दिसंबर को असम के गुवाहाटी में करीब 1.99 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए. 29 और 30 दिसंबर को गुजरात के वडोदरा में दो-दो करोड़ रुपये भेजे गए. 2 जनवरी को 2 करोड़ रुपये दिल्ली के मयूर विहार और 5 जनवरी को 2.05 करोड़ रुपये मुंबई के नेपियन सी रोड स्थित खाते में पहुंचे. 

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, यह मल्टी-लेयर म्यूल अकाउंट नेटवर्क बेहद जटिल है. इसलिए पैसों का पूरा ट्रेल निकालने में समय लग रहा है. पुलिस बैंक और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट की मदद से जुड़े खातों की पहचान कर उन्हें फ्रीज कर रही है. फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है लेकिन जांच तेजी से जारी है.

समझें क्या है डिजिटल अरेस्ट, कैसे बचें?

सभी के लिए यह जानना जरूरी है कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज नहीं होती है. यह कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ठगी करने का एक तरीका है जिससे आपको सावधान रहने की जरूरत है. डिजिटल अरेस्ट वह स्थिति होती है जब ठग करने वाला खुद को ईडी, सीबीआई, कोर्ट, पुलिस या बैंक अधिकारी बताकर आपको डराने और धमकाने की कोशिश करता है. 

ठग आपसे कहेगा कि आपके नाम पर कोई केस दर्ज है, आपके आधार या बैंक अकाउंट का इस्तेमाल गलत काम के लिए किया जा रहा है, आदि. फिर वह आपसे कहेगा कि आपको ‘डिजिटल रूप से गिरफ्तार’ किया जा रहा है. इसके लिए वह आपको घंटों तक वीडियो कॉल पर बैठाकर रखेगा. घर से बाहर जाने से मना करेगा, किसी से बात करने से मना करेगा. 

तुरंत काट दें ऐसे ठगों का कॉल

इतना ही नहीं, ठग आपसे खूब पैसे ट्रांसफर करवाएगा. फर्जी धमकियां देगा. अगर आप उसके स्कैम को समझ नहीं पाए तो डर के मारे उसको पैसे दे भी देंगे, जबकि सच्चाई यही है कि भारत में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज है ही नहीं. पुलिस या सीबीआई आपको कभी वीडियो कॉल नहीं करेगी, न ही आपको डिजिटल तरीके से अरेस्ट करेगी. कोई भी आधिकारिक जांच एजेंसी जांच के लिए आपसे पैसे नहीं मांगेगी. 

अगर आपको भी ऐसे कॉल आते हैं, तो बिना डरे तुरंत कॉल काट दें. ठग को कोई पैसा ट्रांसफर न करें और तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दें या साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें. 



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