Saturday, January 10, 2026
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सबसे महंगी सैलरी! Apple के भारतीय मूल के COO सबीह खान को ₹234 करोड़, CEO टिम कुक की कमाई ने भी उड़ाए होश


एप्पल के सीईओ टिम कुक और सीओओ सबीह खान।- India TV Paisa

Photo:AP/APPLE एप्पल के सीईओ टिम कुक और सीओओ सबीह खान।

दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Apple ने अपनी 2025 की सालाना फाइलिंग में टॉप अधिकारियों की सैलरी का पूरा ब्योरा सामने रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, Apple के सीईओ टिम कुक ने साल 2025 में कुल करीब 74.3 मिलियन डॉलर कमाए, जो भारतीय रुपये में लगभग 668 करोड़ रुपये के बराबर है। aajtak की खबर के मुताबिक, बीते साल सबसे ज्यादा सैलरी पाने वालों में कंपनी के सीओओ और भारतीय मूल के सबीह खान की सैलरी भारतीय मुद्रा में 234 करोड़ रुपये थी। टिम कुक की बात करें तो उनकी कुल कमाई में सबसे बड़ा हिस्सा उनके स्टॉक अवॉर्ड और परफॉर्मेंस-आधारित इनसेंटिव का रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें केवल 3 मिलियन डॉलर बेस सैलरी मिली, जबकि स्टॉक अवॉर्ड के रूप में 57.5 मिलियन डॉलर दिए गए। इसके अलावा, परफॉर्मेंस बोनस और अन्य लाभों के तौर पर उन्हें करीब 12 मिलियन डॉलर मिले। सुरक्षा, यात्रा और अन्य सुविधाओं पर भी कंपनी ने लाखों डॉलर खर्च किए।

मुरादाबाद से हैं सबीह खान

भारतीय मूल के COO सबीह खान ने जुलाई 2025 में यह पद संभाला था। Apple के साथ जुड़े खान की 2025 में कुल कमाई 27 मिलियन डॉलर (लगभग 243 करोड़ रुपये) रही। उनकी सैलरी में बेस सैलरी 1 मिलियन डॉलर (लगभग 9 करोड़ रुपये), स्टॉक अवॉर्ड्स 22 मिलियन डॉलर (लगभग 198 करोड़ रुपये), बाकी हिस्सा परफॉर्मेंस इंसेंटिव्स और अन्य लाभ शामिल रहे।

CFO केवन पारेख ने भी 22.4 मिलियन डॉलर कमाए

Apple के CFO केवन पारेख ने भी 2025 में कमाई के नए रिकॉर्ड दर्ज किए। जनवरी 2025 से इस पद पर कार्यरत भारतीय मूल के अमेरिकी अधिकारी पारेख की कुल कमाई करीब 22.4 मिलियन डॉलर रही, जिसमें बेस सैलरी के साथ स्टॉक अवॉर्ड्स और अन्य लाभ शामिल हैं। यह सैलरी रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब कंपनी की सालाना शेयरहोल्डर मीटिंग नजदीक है, जहां आमतौर पर कंपनी के प्रदर्शन, भविष्य की रणनीति और टॉप अधिकारियों के वेतन पर चर्चा होती है।

खुलासा यह भी दर्शाता है कि बड़ी टेक कंपनियों में टॉप अधिकारियों की कमाई सिर्फ बेस सैलरी तक सीमित नहीं होती। स्टॉक अवॉर्ड्स और परफॉर्मेंस आधारित इनसेंटिव इसका सबसे बड़ा हिस्सा होते हैं। इसी मॉडल के जरिए कंपनियां वरिष्ठ अधिकारियों को लंबे समय तक बनाए रखती हैं और बेहतर नतीजों के लिए प्रेरित करती हैं।

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