वॉशिंगटन डीसी18 मिनट पहले
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अमेरिका ने 7 जनवरी को रूसी झंडे वाले जहाज ‘मैरिनेरा’ को कब्जे में लिया था।
अमेरिका ने जब्त किए गए रूसी झंडे वाले ऑयल टैंकर जहाज ‘मैरिनेरा’ से दो रूसी नागरिकों को रिहा कर दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने शुक्रवार को बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। मारिया ने बताया कि यह फैसला राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस के अनुरोध पर लिया है।
रूस ने अमेरिका पर नागरिकों को छोड़ने के लिए दबाव बनाया था। अमेरिका ने 7 जनवरी को उत्तरी अटलांटिक महासागर में जहाज को को जब्त किया गया था। हालांकि टैंकर पर मौजूद 3 भारतीय मेंबर्स को अब तक रिहा नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मैरिनेरा जहाज पर कुल 28 लोग मौजूद थे। इनमें 17 यूक्रेनी, 6 जॉर्जियाई, 3 भारतीय और 2 रूसी नागरिक थे।
दूसरी तरफ अमेरिका ने आज भी कैरेबियाई सागर में एक और ऑयल टैंकर ओलिना को पकड़ा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह पिछले तीन दिनों में तीसरी बार है जब किसी प्रतिबंधित टैंकर के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
टैंकर ओलिना के क्रू को हिरासत में लिया
अमेरिकी बयान के मुताबिक, टैंकर ओलिना पर सवार लोगों को सुरक्षित तरीके से हिरासत में लिया गया। यह ऑपरेशन एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड से लॉन्च किया गया। पूरे अभियान के दौरान किसी तरह की झड़प या नुकसान की सूचना नहीं है।
फिलहाल यह साफ नहीं किया है कि टैंकर ओलिना किस देश का है या वह किस कंपनी के स्वामित्व में है। जहाज का फ्लैग, मालिकाना हक और क्रू की नागरिकता से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
प्रतिबंधों के उल्लंघन का हवाला देकर जहाज पकड़ रहा अमेरिका
अमेरिका ने वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं। वह इन प्रतिबंधों का हवाला देकर वेनेजुएला से तेल लेकर जाने वाले जहाजों को पकड़ रहा है। अमेरिका ने पिछले महीने 10 दिसंबर को भी वेनेजुएला के तट के पास एक ऑयल टैंकर को जब्त किया था।
अधिकारियों का कहना है कि बुधवार को पकड़ गया मैरिनेरा टैंकर रूस की ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा था, जो वेनेजुएला से तेल ले जा रहा था और उसने अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन किया।
दूसरी तरफ रूस ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन बताया। रूस के परिवहन मंत्रालय ने कहा था कि अमेरिकी सैनिकों ने इस जहाज को खुले समुद्र में रोका, जहां किसी भी देश का अधिकार नहीं होता।
रूस के विदेश मंत्रालय के मुताबिक उसने पहले ही अमेरिका को बता दिया गया था कि यह जहाज रूसी है और सिविल काम के लिए इस्तेमाल हो रहा है।

अमेरिका की यूरोपीय कमांड ने टैंकर जब्त किया
अमेरिका की यूरोपीय मिलिट्री कमांड ने कहा कि इस टैंकर को अमेरिकी फेडरल कोर्ट के आदेश पर पकड़ा गया। अमेरिकी कोस्ट गार्ड काफी समय से इस जहाज पर नजर रखे हुए था। अमेरिका का दावा है कि जहाज जानबूझकर उनसे बचता रहा।

पिछले महीने जहाज का नाम बदला था
अमेरिका ने जिस रूसी जहाज को पकड़ा, पहले इसका नाम बेला-1 था। अमेरिका ने इसे प्रतिबंधित जहाजों की लिस्ट में डाल दिया था। दिसंबर 2025 में यह वेनेजुएला की ओर जा रहा था, लेकिन अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इसे रोकने की कोशिश की।
उस समय जहाज के क्रू मेंबर की होशियारी से यह जहाज बच गया था। अमेरिकी कोस्ट गार्ड के पास इस जहाज को जब्त करने का वारंट था। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि यह जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था और ईरानी तेल ढो रहा था।
तब यह जहाज गुयाना के झंडे के तहत रजिस्टर्ड था, लेकिन इसके बाद इस जहाज का नाम बदलकर ‘मैरिनेरा’ कर दिया गया था। इसके बाद इस पर रूसी झंडा लगाकर इसे देश की ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन लिस्ट में शामिल कर दिया गया।
पकड़े जाने के डर से जहाज ने रास्ता बदला
इसके बाद यह जहाज वेनेजुएला की ओर जा रहा था, लेकिन अमेरिकी ब्लॉक के डर से उसने रास्ता बदलकर अटलांटिक की ओर मोड़ लिया था, लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देश इस जहाज की निगरानी कर रहे थे।
हवाई और समुद्री निगरानी के जरिए इसके हर कदम पर नजर रखी गई। अमेरिकी जहाज USCGC मुनरो ने इसका पीछा करते हुए इसे पकड़ा।
जब अमेरिकी बलों ने इसे उत्तरी अटलांटिक में बोर्ड किया, तब उसके पास रूस का एक सबमरीन और अन्य नौसैनिक जहाज मौजूद थे। हालांकि कोई सीधा टकराव नहीं हुआ। रूसी मीडिया ने जहाज के पास हेलिकॉप्टर की तस्वीरें जारी की हैं।
अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से तेल नहीं खरीद पा रहे देश
दरअसल, दिसंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए ‘शैडो फ्लीट’ पर ब्लॉकेड लगाया था। ताकि वह अमेरिका की शर्तें माने और तेल उद्योग में अमेरिकी कंपनियों को जगह दे।
वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंध की वजह से कई टैंकर सीधे तेल नहीं ले जा पा रहे थे। इसलिए वेनेजुएला और उसके ग्राहक (जैसे चीन) ‘शैडो फ्लीट’ का इस्तेमाल कर रहे थे।
‘शैडो फ्लीट’ का मतलब है ऐसे जहाज जो अपने असली स्थान और पहचान को छिपाकर तेल ले जाते हैं। ये टैंकर अपने ट्रांस्पॉन्डर बंद कर देते हैं या झंडा बदल देते हैं ताकि अमेरिका या दूसरे देश उन्हें ट्रैक न कर सकें। इसे ‘डार्क मोड’ भी कहा जाता है।
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