वॉशिंगटन डीसी13 मिनट पहले
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को आधिकारिक रूप से बाहर निकालने की घोषणा की है। द गार्डियन के मुताबिक, इसमें 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र (UN) संगठन और 31 संयुक्त राष्ट्र संस्थाएं शामिल हैं।
व्हाइट हाउस और स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार, ये संगठन अमेरिकी हितों के खिलाफ हैं। इनमें पैसों की बर्बादी होती है। इसके अलावा ये गैरजरूरी या खराब तरीके से चलाए जा रहे हैं। इस कदम को ट्रम्प की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा बताया जा रहा है, जो वैश्विक संस्थाओं से दूरी बनाने पर जोर देती है।
इससे पहले ट्रम्प ने जनवरी 2025 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बाहर निकलने की घोषणा की थी। WHO की सदस्यता से बाहर निकलने के लिए एक साल का नोटिस पीरियड जरूरी होता है। 22 जनवरी के बाद अमेरिका WHO का सदस्य नहीं रहेगा।

UN कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज से अलग होगा अमेरिका
इस फैसले की सबसे बड़ी बात है अमेरिका का संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) से बाहर होना। UNFCCC 1992 का समझौता है, जो दुनिया के लगभग सभी देशों को जोड़ता है और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करता है।
यह पेरिस जलवायु समझौते के लिए भी अहम है, जिससे ट्रम्प पहले ही अमेरिका को बाहर करने की बात कह चुके हैं। ट्रम्प ने ब्राजील में संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा था।
इसके अलावा, इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) जैसी महत्वपूर्ण जलवायु संस्थाओं से भी अमेरिका अलग हो रहा है। सेंटर फॉर बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी की जीन सू ने कहा कि इस गैरकानूनी कदम से अमेरिका हमेशा के लिए जलवायु कूटनीति से बाहर हो सकता है।
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में अमेरिका दूसरे नंबर पर
एक्सपर्ट का कहना है कि इससे वैश्विक जलवायु प्रयासों को गहरा झटका लगेगा। अमेरिका दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देश है।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक रॉब जैक्सन जैसे विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे दूसरे देशों को अपनी जलवायु प्रतिबद्धता टालने और मनमानी करने का बहाना मिल सकता है। ट्रम्प लंबे समय से जलवायु परिवर्तन को ‘धोखा’ बताते आए हैं।

अमेरिका का UN के फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) से बाहर निकल रहा है।
पूर्व जलवायु सलाहकार बोली- ट्रम्प दशकों की मेहनत बर्बाद कर रहे
ट्रम्प के इस फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है। जो बाइडेन प्रशासन की पूर्व जलवायु सलाहकार जीना मैकार्थी ने इसे कमजोर सोच वाला, शर्मनाक और मूर्खता भरा निर्णय बताया है।
मैकार्थी ने कहा कि अब दुनिया का एकमात्र देश जो UNFCCC का हिस्सा नहीं होगा, वह अमेरिका होगा, जिससे दशकों की अमेरिकी जलवायु नेतृत्व और वैश्विक सहयोग बर्बाद हो जाएगा।
इससे अमेरिका ट्रिलियंस डॉलर की निवेश, नीतियों और फैसलों को प्रभावित करने की क्षमता खो देगा, जो अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाते और महंगी आपदाओं से बचाते।
नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल के अध्यक्ष मनीष बापना ने इसे ‘बेवजह की गलती’ और ‘खुद को नुकसान पहुंचाने वाला’ बताया। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका की चीन से प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता कम हो जाएगी। चीन स्वच्छ ऊर्जा तकनीक में अमेरिका से आगे निकल रहा है।
उन्होंने कहा कि जब बाकी दुनिया स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है, तो ट्रम्प प्रशासन वैश्विक नेतृत्व छोड़ रहा है और स्वच्छ ऊर्जा से आने वाले ट्रिलियंस डॉलर के निवेश से अमेरिका को वंचित कर रहा है।
ट्रम्प का आरोप- जनसंख्या एजेंसी जबरन गर्भपात को बढ़ावा देती
एक और महत्वपूर्ण निकासी है संयुक्त राष्ट्र की जनसंख्या एजेंसी (UNFPA) से, जो दुनिया भर में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं देती है। रिपब्लिकन पार्टी और ट्रम्प पहले भी इस एजेंसी पर चीन जैसे देशों में ‘जबरन गर्भपात’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहे हैं।
हालांकि बाइडेन प्रशासन के समय की जांच में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले थे। ट्रम्प के पहले कार्यकाल में इसकी फंडिंग रोकी गई थी।
भारत की अगुआई वाले संगठन ISA भी छोड़ रहा अमेरिका
भारत की अगुआई वाला संगठन इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) भी प्रभावित होगा। इसे 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन फ्रेंच राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने पेरिस जलवायु सम्मेलन में शुरू किया था। अमेरिका इससे बाहर हो रहा है।
अन्य संगठनों में यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी, इंटरनेशनल कॉटन एडवाइजरी कमिटी, इंटरनेशनल ट्रॉपिकल टिंबर ऑर्गेनाइजेशन, कार्बन फ्री एनर्जी कॉम्पैक्ट और कई सांस्कृतिक और पर्यावरण संबंधी संस्थाएं शामिल हैं।
विदेश मंत्री बोले- हमारे खिलाफ काम करने वालों को आर्थिक सहायता नहीं देंगे
ट्रम्प के फैसले के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बयान जारी कर रहा कि ये समझौते अमेरिका की प्रगति से जुड़े हैं। यह अर्थव्यवस्थाओं और लोगों की जिंदगियों पर असर डाल रहे हैं।
रूबियो ने कहा कि इन संगठनों से अलग होने का कदम राष्ट्रपति ट्रम्प का अमेरिकियों से किए गए वादे को पूरा करता है। हम उन नौकरशाहों को आर्थिक सहायता देना बंद कर देंगे जो हमारे हितों के खिलाफ काम करते हैं। ट्रम्प प्रशासन हमेशा अमेरिका और अमेरिकियों को उपर रखेगा।

चीन से प्रतिस्पर्धा वाले संस्थाओं में दबदबा बनाना चाहता है अमेरिका
ट्रम्प प्रशासन पहले भी यूएन ह्यूमन राइट्स काउंसिल, यूनेस्को और फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए UNRWA जैसी एजेंसियों से बाहर हो चुका है। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट का कहना है कि आगे भी दूसरे संगठनों की समीक्षा जारी रहेगी।
हालांकि, अमेरिका कुछ संस्थाओं में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है जहां चीन से प्रतिस्पर्धा है, जैसे इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब ट्रम्प प्रशासन की विदेश नीति काफी आक्रामक दिख रही है। हाल ही में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला कर विवादास्पद नेता निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है और उन्हें अमेरिका लाया गया है, जहां उन पर मुकदमा चल रहा है।
साथ ही, ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की पुरानी इच्छा फिर जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम अमेरिका को वैश्विक मंच पर अलग-थलग कर सकते हैं, लेकिन ट्रम्प समर्थक इसे अमेरिकी संप्रभुता और करदाताओं के पैसे की बचत बताते हैं। —————————
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