
दुनिया के नक्शे पर एक ऐसा देश, जहां पेट्रोल पानी से भी सस्ता मिल चुका है, लेकिन लोग कूड़े से खाना बटोरने को मजबूर हैं। जहां भुखमरी, बेरोजगारी और अंधेरे में डूबा भविष्य लोगों की रोजमर्रा की सच्चाई है। उसी वेनेजुएला पर अब अमेरिका जैसे सुपरपावर ने ड्रोन और रॉकेट तान दिए हैं। राजधानी काराकास पर हुए कथित अमेरिकी हमले और ब्लैकआउट ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान इस सवाल पर खींच लिया है कि आखिर इस गरीब और खस्ताहाल देश में ऐसा क्या है, जिसके पीछे अमेरिका पड़ गया है?
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव कोई नया नहीं है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे नार्को टेररिज़्म यानी ड्रग तस्करी के खिलाफ कार्रवाई बता रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि वेनेजुएला की सरकार ड्रग कार्टेल्स को संरक्षण दे रही है। वहीं वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो इसे सीधे-सीधे अमेरिका की साजिश बताते हैं। मादुरो का कहना है कि असली वजह ड्रग्स नहीं, बल्कि उनका देश और उसकी जमीन के नीचे छुपा अथाह खजाना है।
वेनेजुएला के पास क्या खजाना?
दरअसल, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। वर्ल्डोमीटर के आंकड़ों के मुताबिक, वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल का ऑयल रिजर्व है, जो सऊदी अरब से भी ज्यादा है। देश की अर्थव्यवस्था का लगभग 90% हिस्सा तेल से होने वाली कमाई पर निर्भर है। इसके अलावा यहां नेचुरल गैस, सोना, बॉक्साइट और कोयले जैसे बहुमूल्य संसाधनों की भी भरमार है। यही खजाना अमेरिका की नजर में है।
अमेरिका की नजर
अमेरिका खुद को ऊर्जा महाशक्ति मानता है, लेकिन उसके पास मौजूद तेल भंडार के बावजूद उसे भारी और खट्टे कच्चे तेल का आयात करना पड़ता है। वेनेजुएला का तेल अमेरिकी रिफाइनरियों के लिए बेहद मुफीद है और भौगोलिक रूप से भी यह अमेरिका के बेहद करीब है। यही वजह है कि अमेरिका लंबे समय से वेनेजुएला पर आर्थिक प्रतिबंध लगाकर उसकी सरकार को कमजोर करने की कोशिश करता रहा है।
एक्सपर्ट की राय
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर वेनेजुएला में अमेरिका समर्थित सरकार आती है, तो उसके तेल भंडार अमेरिकी कंपनियों के लिए खुल सकते हैं। इससे न सिर्फ अमेरिका का वैश्विक तेल बाजार पर दबदबा बढ़ेगा, बल्कि रूस और अन्य तेल उत्पादक देशों पर उसकी पकड़ और मजबूत होगी।


