Saturday, January 3, 2026
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Indians and Sikhs Targeted in NZ: Brian Tamaki & Destiny Church Protest Nagar Kirtan Ahead of 2026 Elections | न्यूजीलैंड में चुनाव से पहले सिख निशाने पर: टमाकी गुट का धार्मिक ध्रुवीकरण, बोले- इन्हें नियमों में छूट दी; नगर कीर्तन का कर चुके विरोध – Jalandhar News


न्यूजीलैंड के टमाकी गुट की तरफ से नगर कीर्तन के विरोध को सही बताता उनका समर्थक।

न्यूजीलैंड में सिखों-हिंदुओं और अन्य धर्मों पर बयानबाजी तेज हो गई है। कई लोग और गुट क्रिश्चियन के अलावा अन्य धर्मों का न्यूजीलैंड में विरोध भी कर रहे हैं। बीते दिनों सिखों के नगर कीर्तन को रोकने वाले ब्रायन टमाकी गुट के अलावा न्यूजीलैंड के न्यू नेशन

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इसका कारण न्यूजीलैंड में 2026 का आम चुनाव बताया जा रहा है। हालांकि इसकी डेट फाइनल नहीं हुई है। लेकिन इससे पहले सिख निशाने पर आ गए हैं।

न्यूजीलैंड के होली हेक पेज पर पहली बार सिख नगर कीर्तन का विरोध करने वाले टमाकी के समर्थक ने कहा कि न्यूजीलैंड में बहुत से हाका करने के विरोध में हैं। वे लोग नहीं जानते कि वह क्या कह रहे हैं। वे पागल हो चुके हैं।

टमाकी समर्थक ने कहा कि हम सिखों का विरोध नहीं कर रहे। विरोध खालिस्तानी झंडे लहराने, एक देश में दो तरह के कानून बनाने और बढ़ते विदेशियों की संख्या के खिलाफ है।

न्यूजीलैंड के एक अन्य न्यूज नेशन पार्टी पेज पर ब्रेंट डगल्स कहते हैं कि दक्षिण ऑकलैंड में नगर कीर्तन को रोकने वाले ब्रायन टमाकी और डेस्टिनी चर्च से जुड़े लोगों को आप समर्थन करें या न करें। लेकिन इन्होंने न्यूजीलैंड में सिखों से जुड़े कुछ मुद्दों को सामने लाया है।

जानें न्यूजीलैंड में सिख, धार्मिक कार्यक्रम और धर्म निशाने पर क्यों?

  • सरकार का एंटी गुट बना रहा धार्मिक माहौल: न्यूजीलैंड में इसी साल आम चुनाव होने हैं। चुनाव के लिए अभी डेट फाइनल नहीं हुई है। लेकिन इससे पहले माहौल को धार्मिक रंगत दी जा रही है। ब्रायन टमाकी और डेस्टिनी चर्च से जुड़ा एक गुट देश में सिखों, हिंदुओं, मुस्लिमों को लेकर कैंपेन चला रहा है। इसमें कहा जा रहा है कि इनके चलते देश में कई कानून बन गए हैं। न्यूजीलैंड में बड़े-बड़े मंदिर बना दिए गए हैं।
  • विदेश से आए लोगों को नियमों में छूट दी जा रही: गुट का कहना है कि सिखों के लिए ट्रैफिक नियम तक बदल दिए गए हैं। उनको 50 की स्पीड लिमिट तक बाइक चलाने पर हेलमेट न पहनने की छूट है। वो अपने साथ कहीं भी गातरा (चाकू) रख सकते हैं। लेकिन जिन न्यूजीलैंड के लोगों का देश है, उनके लिए अलग कानून है। सरकार अपने वोट बैंक के लिए विदेश से आए लोगों के लिए नियमों में छूट दे रही है।
  • टमाकी समर्थक बोले- हाका न्यूजीलैंड का कल्चर: टमाकी समर्थकों ने कहा कि हम लोग बड़े पैमाने पर न्यूजीलैंड के लोगों के पलायन और बाहर से आने वालों के खिलाफ हाका कर रहे हैं। ये हाका न केवल सिखों के नगर कीर्तन के खिलाफ था बल्कि सरकार के उन लोगों के खिलाफ भी था जो न्यूजीलैंड के कानूनों को बदल रहे हैं। बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन का मतलब आक्रमण है।
  • खालिस्तानी झंडे फहराए जा रहे, सरकार बेबस: समर्थकों ने कहा कि सड़कों पर देवताओं को स्थापित करना गलत है। वे लोग खालिस्तान आंदोलन के झंडे फहरा रहे थे, जिसे भारत में एक आतंकवादी संगठन माना जाता है। आप इस देश में आकर अपने देश का संघर्ष नहीं ला सकते। खैर, आप ला सकते हैं अगर आप चाहें, क्योंकि सरकार इसके बारे में कुछ नहीं करती। उनके पास कोई ताकत नहीं है।
  • सरकार कानून में छूट देकर एक वर्ग के आगे झुकी: टमाकी समर्थक ने वीडियो जारी कर कहा कि यह एक और बुरी बात है। सिखों के लिए बाइक चलाते समय अपना एक अलग कानून है। पगड़ी के कारण यदि वे 50 किमी या उससे कम की स्पीड से यात्रा कर रहे हैं, तो उन्हें हेलमेट पहनने की जरूरत नहीं है। उन्हें धार्मिक छूट मिलती है। इनके के लिए अलग कानून है और बाकी सभी को दूसरे कानून का पालन करना पड़ता है।
  • हर जगह 50 फीट की मूर्तियों वाले मंदिर होंगे​​​​​​: ​टमाकी समर्थक ने कहा कि अब, आप सोच रहे होंगे कि ‘अरे, यह इतना बुरा नहीं है,’ या ‘अरे, उन्हें ऐसा करने दो, यह ठीक है, लेकिन सरकार यही करती रहती है। वे इन विदेशी विचारधाराओं के सामने झुकते रहते हैं और वे धीरे-धीरे कदम दर कदम और अधिक आजादी लेते जाते हैं। इस्लाम भी यही कर रहा है। एक दिन हर जगह मस्जिदें होंगी जो दिन में पांच बार अजान देंगी। हर जगह 50 फीट की मूर्तियों वाले भारतीय मंदिर होंगे।

स्थानीय लोग बोले- सिखों के नहीं, दोहरे रवैए के खिलाफ न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में रहने वाले ब्रेंट डगल्स कहते हैं कि सिख हाल ही में यहां चर्चा में हैं। उनके खिलाफ कोई नस्लवादी टिप्पणी नहीं है। सिखों का न्यूजीलैंड में कोई विरोध नहीं है। विरोध केवल कुछ लोगों के कारण यहां की सरकारों की तरफ से अपनाए जा रहे दोहरे रवैये पर है।

ब्रेंट कहते हैं कि यहां कई भारतीय मेरे दोस्त हैं। वे न्यूजीलैंड में कीवी बनकर रहते हैं। भारत के भारतीयों की तरह नहीं। दक्षिण ऑकलैंड में ब्रायन टमाकी और डेस्टिनी चर्च से जुड़े लोगों ने नगर-कीर्तन का जो विरोध किया, उसने कई लोगों की आंखें खोल दीं।

न्यूजीलैंड में खालिस्तानी झंडों की बढ़ती संख्या पर चिंता ब्रेंट डगल्स कहते हैं कि आतंकवादी सिख संगठन खालिस्तान के झंडे न्यूजीलैंड की सड़कों पर लहराए जा रहे हैं। हमने यहां खालिस्तानी झंडों का विरोध किया है, किसी ने भी सिखों के धार्मिक झंडे का विरोध नहीं किया। न्यूजीलैंड में आतंकवादी समूह और इनके झंडों की बढ़ रही संख्या चिंता का विषय है। सिख अपनी मान्यताओं के कारण कहीं भी किरपाण ले जाने की अनुमति रखते हैं।

किसी अन्य को ऐसा करने की अनुमति नहीं है। सिखों का दावा है कि गातरा उनका धार्मिक चिह्न है और ये धारदार नहीं होता। हालांकि ये तर्क देने के बावजूद वो ये भी दावा करते हैं कि यह आत्मरक्षा के लिए है। ये दोनों दावे एक साथ नहीं हो सकते।



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