Anant Ambani: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने अपने चेयरमैन मुकेश अंबानी के सबसे छोटे बेटे अनंत अंबानी के लिए साल 2025 कई मामलों में अहम रहा. उन्होंने न केवल कॉर्पोरेट लेवल पर नई जिम्मेदारी संभाली, बल्कि आध्यात्म से लेकर वन्य जीवों के संरक्षण को लेकर भी इस दौरान काफी सक्रिय नजर आए. चाहें गुजरात के जामनगर से द्वारकाधीश मंदिर तक लगभग 140 किलोमीटर लंबी पदयात्रा की बात हो या वन्यजीव संरक्षण और पशु कल्याण का जिक्र हो, इस साल उनके व्यक्तित्व के कई अलग-अलग पहलुओं की झलक देखने को मिली.
VIDEO | Son of Reliance Industries Chairman Mukesh Ambani, Anant Ambani completes his 170-km-long ‘padyatra’ from Jamnagar to the Dwarkadhish Temple in Gujarat.
He says, “Jai Dwarkadhish, I want to wish people on Ram Navami. I have taken the ‘darshan’. Thank you.”#anantambani… pic.twitter.com/QBVrYPudXK
— Press Trust of India (@PTI_News) April 6, 2025
कभी भक्ति में डूबे, तो कभी कॉर्पोरेट फ्रंट पर एक्टिव
साल की शुरुआत में 27 मार्च के आसपास अनंत ने जामनगर स्थित अपने आवास से द्वारका तक 140 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ. यह न केवल ईश्वर, भक्ति व आस्था में उनके अटूट विश्वास को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अपने लिए संकल्प को वह किस दृढ़ता और अनुशासन के साथ पूरा करते हैं. इसके बाद अगले कुछ महीनों में उन्हें कॉर्पोरेट लेवल पर भी कई जिम्मेदारियां मिलीं. उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर लीडरशिप की एक नई जिम्मेदारी संभाली. इससे पहले फरवरी के महीने में महाकुंभ पहुंचकर उन्होंने पवित्र संगम में आस्था की डुबकी भी लगाई और श्रद्धालुओं के बीच मिठाइयां भी बांटी.
बेजुबानों का भी रखा ख्याल
भक्ति, आस्था व बिजनेस में अपनी जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर अनंत अंबानी ने बेजुबानों के बारे में भी सोचा. गुजरात के वनतारा में बेसहारा जानवरों के लिए बने रेस्क्यू सेंटर में उनका बेहतरी से ख्याल रखा. दिसंबर 2025 में अंबानी को वाशिंगटन, डी.सी. में ग्लोबल ह्यूमन सोसाइटी से पशु कल्याण के लिए ग्लोबल ह्यूमैनिटेरियन अवार्ड भी मिला. यह सम्मान एक मील का पत्थर है, जिससे वह यह पुरस्कार पाने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति और पहले एशियाई बन गए. ग्लोबल ह्यूमन सोसाइटी के अनुसार, अंबानी को वनतारा में जानवरों के रख-रखाव, उनके इलाज, संरक्षण में उनकी निभाई गई भूमिका के लिए चुना गया.
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