Friday, January 2, 2026
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More than 600 pits were found in Turkiye’s fields. | ज्यादा गेंहू उपज से तुर्किये में 100फीट चौड़े गड्ढे बने: खेतों में अब तक 684 सिंकहोल की पहचान हुई; ग्राउंड वाटर लेवल घटने से जमीन धंस रही


अंकारा4 घंटे पहले

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तुर्किये का कोन्या मैदान, जिसमें 684 गड्ढों की पहचान की गई है। - Dainik Bhaskar

तुर्किये का कोन्या मैदान, जिसमें 684 गड्ढों की पहचान की गई है।

तुर्किये का अन्न भंडार कहा जाने वाला कोन्या मैदान इन दिनों एक गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। यहां तुर्किये का सबसे ज्यादा गेहूं उगाया जाता है। कोन्या मैदान का कुल कृषि क्षेत्र लगभग 2.6 मिलियन हेक्टेयर है, जो तुर्किये के कुल कृषि क्षेत्र का 11.2% है।

क्षमता से ज्यादा उपज और ग्राउंड वाटर के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण यह इलाका सूखा का सामना कर रहा है। इससे जमीनों में सैकड़ों गड्ढे (सिंकहोल) बन रहे हैं, जो खेतों को बर्बाद कर रहे हैं।

तुर्किये की आपदा प्रबंधन एजेंसी AFAD की नई रिपोर्ट के अनुसार, कोन्या बेसिन में अब तक 684 ऐसे गड्ढों की पहचान की गई है।

जबकि कोन्या तकनीकी विश्वविद्यालय के सिंकहोल रिसर्च सेंटर के अनुसार, 2017 में 299 सिंकहोल थे, जो 2021 तक बढ़कर 2,550 हो गए।

साल 2025 में करीब 20 नए बड़े सिंकहोल बनने की पुष्टि हुई है। इन गड्ढों की गहराई 30 मीटर से ज्यादा और चौड़ाई 100 फीट तक बताई जा रही है।

तुर्किये के कोन्या मैदान में 30 मीटर गहरे और 100 फीट तक चौड़े गड्ढे बन गए हैं।

तुर्किये के कोन्या मैदान में 30 मीटर गहरे और 100 फीट तक चौड़े गड्ढे बन गए हैं।

प्रशासन की अनदेखी के कारण संकट बढ़ा

यह संकट अचानक नहीं आया है, बल्कि पिछले 20 साल से किसानों और प्रशासन की अनदेखी के कारण यह धीरे-धीरे बढ़ी है।

2025 में यह समस्या और तेज हुई है, क्योंकि सूखा और भूजल दोहन काफी बढ़ गया है। AFAD की रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ करापिनार जिले में 534 सिंकहोल हैं, और ये मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह इंसानों के कारण आई आपदा है, लापरवाही ने इसे और बढ़ावा दिया है।

तुर्किये में जमीनों में सैकड़ों गड्ढे (सिंकहोल) बन रहे हैं, जो खेतों को बर्बाद कर रहे हैं।

तुर्किये में जमीनों में सैकड़ों गड्ढे (सिंकहोल) बन रहे हैं, जो खेतों को बर्बाद कर रहे हैं।

सिंकहोल बनने के तीन अहम कारण जानिए

भूवैज्ञानिक संरचना:

कोन्या मैदान की भूवैज्ञानिक संरचना ‘कार्स्ट’ टाइप की है, मतलब यह मैदान कार्बोनेट और जिप्सम जैसी घुलनशील चट्टानों से बना है।

ये चट्टानें हजारों सालों में पानी में घुलकर गड्ढे बनाती हैं। पहले यहां सिंकहोल बहुत कम बनते थे, लेकिन ग्राउंड वाटर के कम होने से मैदान सहारा खो देती हैं और अचानक ढह जाती हैं, जिससे सतह पर बड़े गड्ढे बन जाते हैं।

बारिश में कमी:

तुर्किये में पिछले 15 सालों में वाटर लेवल सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। जलवायु परिवर्तन ने बारिश को कम कर दिया, जिससे जल भंडार रिचार्ज नहीं हो पाते।

ग्राउंड वाटर का स्तर घटना:

कोन्या में चुकंदर, मक्का और अन्य पानी-गहन फसलों की सिंचाई के लिए हजारों वैध और अवैध कुएं चल रहे हैं। 1970 के दशक से कुछ इलाकों में ग्राउंड वाटर लेवल 60 मीटर तक गिर चुका है। अवैध कुओं और अनियंत्रित पंपिंग ने जमीन को कमजोर कर दिया है, जिससे जमीन अचानक धंस रही है।

कोन्या मैदान कार्बोनेट और जिप्सम जैसी घुलनशील चट्टानों से बना है। ये चट्टानें पानी में घुलकर गड्ढे बनाती हैं।

कोन्या मैदान कार्बोनेट और जिप्सम जैसी घुलनशील चट्टानों से बना है। ये चट्टानें पानी में घुलकर गड्ढे बनाती हैं।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी- सिंकहोल की संख्या तेजी से बढ़ेगी

एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर मौजूदा स्थिति जारी रही तो सिंकहोल की संख्या और तेजी से बढ़ेगी। कोन्या तकनीकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ता के मुताबिक अगर ग्राउंड वाटर के इस्तेमाल पर लगाम नहीं लगाया तो यह संकट और गहराएगा।

AFAD अब जोखिम वाले इलाकों का नक्शा बना रही है और 1,850 क्षेत्रों में धसाव के संकेत मिले हैं। भविष्य में, अगर जलवायु परिवर्तन से सूखा जारी रहा, तो न केवल कोन्या बल्कि पड़ोसी करामन और अक्सराय जैसे इलाके भी प्रभावित होंगे।

हालांकि, सरकार अवैध कुओं पर रोक लगा रही है और बेहतर जल प्रबंधन की दिशा में कदम उठा रही है।

तुर्किये में 2025 तक सिंकहोल की संख्या बढ़कर 2,500 से ज्यादा हो गई है।

तुर्किये में 2025 तक सिंकहोल की संख्या बढ़कर 2,500 से ज्यादा हो गई है।

सिंकहोल से तुर्किये में पलायन बढ़ने का खतरा

यह संकट तुर्की की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण पर गहरा असर डालेगा। कोन्या मैदान देश का ‘अन्न भंडार’ है, जहां गेहूं और अन्य अनाज का बड़ा हिस्सा पैदा होता है।

सिंकहोल से हजारों हेक्टेयर खेत बर्बाद हो रहे हैं, जिससे किसान जोखिम वाली जमीन छोड़ने को मजबूर हैं। इससे अनाज उत्पादन घट सकता है, जो आयात पर निर्भर तुर्की के लिए समस्या बढ़ाएगा।

आर्थिक रूप से, कृषि क्षेत्र में नुकसान करोड़ों डॉलर का हो सकता है, और किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। पर्यावरणीय दृष्टि से, भूजल की कमी से जैव विविधता प्रभावित हो रही है, और सिंकहोल जानवरों और मनुष्यों के लिए खतरा हैं।

सामाजिक रूप से, ग्रामीण समुदायों का पलायन बढ़ सकता है, जो शहरीकरण की समस्या पैदा करेगा। हालांकि, सरकार की निगरानी और जोखिम मैपिंग से कुछ हद तक बचाव संभव है।

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