Medicine Overdose In Children Side Effects: जब भी बच्चा बीमार पड़ता है, ज्यादातर माता-पिता सबसे पहले दवाई की बोतल उठाते हैं, थोड़ा खांसी का सिरप, पैरासिटामोल या उल्टी रोकने की दवा. इरादा सिर्फ एक होता है बच्चे को जल्दी आराम मिल जाए. लेकिन देशभर के बच्चों के डॉक्टर बता रहे हैं कि आजकल कई बच्चे बीमारी से ज्यादा गलत दवा और ओवरडोज की वजह से इमरजेंसी वार्ड में पहुंच रहे हैंय
हैदराबाद की पीडियाट्रिशन डॉ. शिवरंजनी संतोष, जिन्होंने कुछ समय पहले नकली ओरएस को लेकर चर्चा बटोरी थी, अब वे चेतावनी दे रही हैं कि बच्चों में दवाइयों की गलत मात्रा देना एक खतरनाक और चुपचाप बढ़ता ट्रेंड बन गया है. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में माता-पिता से ‘One Strength of Paracetamol, One India’ नाम की याचिका पर साइन करने की अपील भी की, ताकि बाजार में उपलब्ध अलग-अलग दवा स्ट्रेंथ की वजह से होने वाली कंफ्यूजन कम हो सके.
डॉक्टर ने क्या कहा
डॉ. शिवरंजनी संतोष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “अगर दवा न भी दें, तो चलता है, लेकिन गलत या ज्यादा मात्रा बिल्कुल नहीं.” उनके मुताबिक कई माता-पिता जल्द असर देखने की जल्दी में बच्चे को इतनी ज्यादा दवा दे देते हैं कि डोज़ कभी-कभी 10 गुना तक पहुंच जाती है. डॉक्टर बताती हैं कि ओवरडोज के कई केस इतने गंभीर होते हैं कि बच्चों को कोमा, दौरे या सांस धीमी होने तक की स्थिति में अस्पताल लाना पड़ता है. भारत में पैरासिटामोल, खांसी-जुकाम की दवाएं, उल्टी रोकने की ड्रॉप्स, ये सब कई तरह की स्ट्रेंथ में मिलते हैं, लेकिन नाम अक्सर एक ही रहते हैं, जिससे माता-पिता गलती कर बैठते हैं.
Pls do sign the petition- One strength of Paracetamol One India. Link – https://t.co/F2Uq0DfWFH
Attached the editorial by Dr Prof Gitanjali B in the journal of pharmacology and pharmacotherapeutics (Sep 2011)Even if you don’t give medicine to the child it’s ok, but do not… pic.twitter.com/hwcOU1U6W9
— Dr.Sivaranjini (@dr_sivaranjani) December 8, 2025
उन्होंने कुछ आम गलतियां भी गिनाईं, जिनकी वजह से बच्चे खतरे में पड़ जाते हैं-
ड्रॉप्स और सस्पेंशन का फर्क न समझना– डोमस्टल ड्रॉप्स और डोमस्टल सस्पेंशन का डोज एक जैसा नहीं होता. 2 एमएल ड्रॉप्स देना मतलब बच्चे को 10 गुना ज्यादा दवा देना.
एक जैसा नाम, पर अलग फॉर्मूलेशन– सिनारेस्ट ड्रॉप्स, सिनारेस्ट सिरप, सिनारेस्ट एफ, सिनारेस्ट एफ न्यू – सभी अलग हैं. इनमें से कई 4 साल से कम उम्र के बच्चों को देने की अनुमति ही नहीं है।
मैक्सट्रा ड्रॉप्स बनाम मैक्सट्रा सिरप– एक ही नाम, पर अलग कंपोज़िशन और अलग उम्र के अनुसार डोज.
एक दिन में कई खांसी की दवाएं– माता-पिता समझ नहीं पाते कि अलग-अलग दवाओं में एक ही तत्व दोहराया जा रहा है, जिससे डोज दोगुनी या तिगुनी हो जाती है.
पैरासिटामोल के कई वेरिएंट– क्रोसिन ड्रॉफ, क्रोसिन 120, क्रोसिन 240, पी500, इनके नाम मिलता-जुलता लेकिन स्ट्रेंथ बिल्कुल अलग. डोज़ गड़बड़ा जाना बहुत आसान है.
डॉ. संतोष सलाह देती हैं कि हर दवा देने से पहले, आपको कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे कि-
- प्रिस्क्रिप्शन को दो बार पढ़ें
- बोतल का लेबल चेक करें
- एक्सपायरी जरूर देखें
- दवाइयों को हमेशा बच्चों की पहुंच से दूर रखें
डॉक्टर के अनुसार, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या इंटरनेट सलाह पर भरोसा करके बच्चों को दवा देना बहुत खतरनाक हो सकता है. दवाओं के मामले में सिर्फ डॉक्टर की बात ही अंतिम होनी चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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