देश में प्रशासनिक पदों को लेकर आम लोगों के बीच अक्सर भ्रम की स्थिति बनती है. खासकर डीएम (District Magistrate) और पुलिस कमिश्नर (Police Commissioner) जैसे बड़े पदों को लेकर कई सवाल उठते हैं. लोग जानना चाहते हैं कि इन दोनों में से कौन ज्यादा पावरफुल होता है, किसकी जिम्मेदारी क्या होती है और इनके वेतन और सुविधाएं कितनी हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं दोनों पदों के कामकाज, अधिकार और सैलरी.
डीएम
डीएम यानी जिला मजिस्ट्रेट IAS अधिकारी होते हैं और किसी जिले का मुखिया होता है. इसे जिले की सुपरवाइजर कुर्सी कहा जा सकता है. डीएम जिले में लॉ एंड ऑर्डर, राजस्व प्रशासन, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, विकास कार्यों की निगरानी और आपदा प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां संभालते हैं.
डीएम बनने के लिए IAS अधिकारी के रूप में आमतौर पर 5-6 साल का अनुभव जरूरी होता है. डीएम जिले में अंतिम फैसलों का अधिकार रखते हैं. किसी भी जिले में धारा 144 लागू करना, सरकारी नीतियों को जमीन पर क्रियान्वित कराना और विकास कार्यों की देखरेख करना डीएम की जिम्मेदारी होती है. डीएम को जिले में प्रशासनिक शक्ति की वजह से बहुत पॉवरफुल माना जाता है. वे राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भी काम करते हैं.
पुलिस कमिश्नर
पुलिस कमिश्नर का पद महानगरों में लागू होता है, जहां जनसंख्या और अपराध की संख्या ज्यादा होती है. जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरू, कोलकाता. कमिश्नरेट सिस्टम में पुलिस कमिश्नर को सबसे बड़ा अधिकारी माना जाता है.
पुलिस कमिश्नर IPS अधिकारी होते हैं. उनके पास एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट का अधिकार होता है. वे कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीधे निर्णय ले सकते हैं. कमिश्नर सिस्टम वाले शहरों में, SP और अन्य पुलिस अधिकारी कमिश्नर को रिपोर्ट करते हैं. कमिश्नर का रैंक राज्यों के नियम पर निर्भर करता है. जैसे दिल्ली में कमिश्नर DGP रैंक के अधिकारी होते हैं, जबकि अन्य शहरों में IGP रैंक के अधिकारी भी कमिश्नर बन सकते हैं.
कैसे बनते हैं डीएम और पुलिस कमिश्नर
डीएम बनने के लिए UPSC सिविल सेवा परीक्षा क्लियर करनी होती है. IAS अधिकारी बनकर कई साल अनुभव के बाद उन्हें जिले का DM नियुक्त किया जाता है. पुलिस कमिश्नर बनने के लिए पहले IPS अधिकारी बनना जरूरी है. इसके लिए UPSC सिविल सेवा परीक्षा के तहत प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू क्लियर करना होता है. IPS अधिकारी के रूप में ASP, DSP या SP रैंक पर काम करने के बाद अनुभव के आधार पर कमिश्नर बनाया जाता है.
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