Wednesday, August 26, 2026
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Former World Snooker Champion Graeme Dott Convicted of Sexual Assault


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ग्लासगो 7 मिनट पहले

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 ग्रेम डॉट 2006 वर्ल्ड स्नूकर चैंपियन बने थे।  - Dainik Bhaskar

ग्रेम डॉट 2006 वर्ल्ड स्नूकर चैंपियन बने थे।

पूर्व वर्ल्ड स्नूकर चैंपियन ग्रेम डॉट को बच्चों के यौन शोषण के दो मामलों में दोषी पाया गया है। 49 साल के डॉट के खिलाफ ग्लासगो हाई कोर्ट में पांच दिन तक सुनवाई चली। ज्यूरी ने उन्हें 1993 से 1996 के बीच एक लड़की और 2006 से 2010 के बीच एक लड़के के साथ किए गए यौन दुर्व्यवहार से जुड़े दोनों मामलों में दोषी माना।

अदालत ने डॉट की सजा पर फैसला अगली सुनवाई में करने का आदेश दिया है। यह सुनवाई 29 सितंबर 2026 को एडिनबर्ग में होगी। तब तक डॉट हिरासत में रहेंगे।

लड़की ने 1990 के दशक के दुर्व्यवहार के बारे में बताया

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि डॉट ने 1990 के दशक में एक स्कूली लड़की के साथ कई बार अनुचित व्यवहार किया। अब 40 की उम्र में पहुंच चुकी महिला ने आरोप लगाया कि डॉट ने उसे गलत तरीके से छुआ और उसे यौन गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश की।

महिला ने अदालत में बताया कि इन घटनाओं से वह डर गई और सदमे में थी। डॉट ने उसे एक टेडी बियर भी दिया था। पुलिस ने 2001 में इन आरोपों को लेकर डॉट से संपर्क किया था, लेकिन उस समय कोई चार्ज नहीं लगाया गया।

दूसरे मामले में करीब 8 साल के लड़के के साथ दुर्व्यवहार

दूसरे मामले में एक लड़के ने अदालत को बताया कि डॉट ने 2006 के बाद उसका यौन शोषण किया। उस समय उसकी उम्र करीब 8 साल थी। उसने अदालत में डॉट पर बाथरूम, कार और अन्य जगहों पर अनुचित तरीके से छूने और यौन दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया।

उसने यह भी बताया कि डॉट उसे चिप्स, सॉफ्ट ड्रिंक और एक बार 50 पाउंड देकर ‘इनाम’ देता था।

डॉट ने सभी आरोपों को झूठा बताया था

डॉट ने सुनवाई के दौरान आरोपों को गलत बताया था और कहा था कि उन्होंने कभी किसी के साथ अनुचित व्यवहार नहीं किया। इसके बावजूद ज्यूरी ने दोनों मामलों में उन्हें दोषी माना। पुलिस स्कॉटलैंड के डिटेक्टिव इंस्पेक्टर गैरी स्मिली ने डॉट को ‘खतरनाक व्यक्ति’ बताया।

2006 में वर्ल्ड चैंपियन बने थे डॉट

ग्रेम डॉट ने 2006 में वर्ल्ड स्नूकर चैंपियनशिप का खिताब जीता था। वह 2004 और 2010 में भी वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचे थे।

स्नूकर संस्था ने हमेशा के लिए सदस्यता खत्म की

दोषी पाए जाने के बाद वर्ल्ड प्रोफेशनल बिलियर्ड्स एंड स्नूकर एसोसिएशन (WPBSA) ने डॉट की सदस्यता तत्काल प्रभाव से स्थायी रूप से रद्द कर दी। संस्था ने उन्हें खेल से पूरी तरह हटाने का फैसला लिया है और वर्ल्ड स्नूकर से उन्हें हॉल ऑफ फेम से हटाने का अनुरोध भी किया है।

डॉट को अप्रैल 2025 में ही प्रोफेशनल स्नूकर की सभी गतिविधियों से निलंबित कर दिया गया था। 2025-26 सीजन खत्म होने के बाद उन्हें प्रोफेशनल रैंकिंग से भी हटा दिया गया था।

भारत में भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

खेलों में बच्चों के यौन शोषण के मामले भारत में भी सामने आए हैं। इनमें कई मामलों में कोच या ट्रेनर पर नाबालिग खिलाड़ियों के शोषण के आरोप लगे और कुछ मामलों में अदालत ने दोषी ठहराकर सजा भी सुनाई।

1. आर्चरी कोच कुलदीप वेदवान को 5 साल की सजा

2026 में हरियाणा की फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने राष्ट्रीय स्तर के आर्चरी कोच कुलदीप वेदवान को नाबालिग महिला तीरंदाज से यौन दुर्व्यवहार के मामले में 5 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत उन्हें दोषी माना और 15 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। मामला 2023 की एक प्रतियोगिता के दौरान का था।

2. केरल के क्रिकेट कोच मनु एम के खिलाफ कई मामले

केरल के तिरुवनंतपुरम में क्रिकेट कोच मनु एम के खिलाफ नाबालिग खिलाड़ियों के यौन शोषण के कई मामले सामने आए। 2024 में एक पूर्व प्रशिक्षु के शिकायत करने के बाद अन्य लड़कियां भी सामने आईं और कुल 6 मामले दर्ज हुए। अदालत ने 2026 में कई मामलों में उन्हें दोषी ठहराया।

एक मामले में उन्हें 10 साल की कठोर कैद और 66 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। दूसरे मामले में उन्हें 48 साल की कठोर कैद सुनाई गई, जबकि जून 2026 में चौथे मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उनकी कुल सजा 127 साल तक पहुंच गई; प्रभावी तौर पर उन्हें 42 साल जेल में रहना होगा।

3. शूटिंग कोच अंकुश भारद्वाज पर नाबालिग खिलाड़ी का आरोप

2026 में शूटिंग कोच और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता अंकुश भारद्वाज के खिलाफ एक नाबालिग शूटर ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। पुलिस ने POCSO के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू हुई।

4. हॉकी ट्रेनिंग के दौरान नाबालिग खिलाड़ी से यौन दुर्व्यवहार का मामला

BSF की ‘प्रहरी बाल विकास योजना’ के तहत हॉकी ट्रेनिंग ले रही 12 साल की नाबालिग खिलाड़ी से कथित यौन दुर्व्यवहार का मामला भी अदालत तक पहुंचा। 2021 की घटना में हॉकी कोच पर POCSO के तहत गंभीर यौन हमले का आरोप लगाया गया था।

दुनिया में खेलों से जुड़े बड़े मामले

1. लैरी नासर, जिम्नास्टिक्स का सबसे बड़ा मामला

अमेरिका में जिम्नास्टिक्स के पूर्व टीम डॉक्टर लैरी नासर का मामला दुनिया के सबसे चर्चित खेल यौन शोषण मामलों में शामिल है। नासर पर युवा महिला जिम्नास्टों के लंबे समय तक यौन शोषण के आरोप लगे थे। 2018 में उन्हें 40 साल तक की जेल की सजा सुनाई गई।

2. बैरी बेनेल, ब्रिटिश फुटबॉल का बड़ा मामला

ब्रिटेन में पूर्व फुटबॉल कोच और स्काउट बैरी बेनेल पर बच्चों के यौन शोषण के कई मामले सामने आए। वह मैनचेस्टर सिटी से भी जुड़े रहे थे।

2018 में उन्हें 50 मामलों में दोषी ठहराकर 30 साल की जेल की सजा सुनाई गई। अदालत में बताया गया कि उन्होंने 1979 से 1990 के बीच 8 से 15 साल की उम्र के 11 लड़कों का शोषण किया था।

3. जेरी सैंडस्की, अमेरिकी कॉलेज फुटबॉल

अमेरिका में पेन स्टेट के पूर्व असिस्टेंट फुटबॉल कोच जेरी सैंडस्की को 2012 में बच्चों के यौन शोषण के 45 मामलों में दोषी पाया गया। मामले में 10 लड़कों के साथ करीब 15 साल तक दुर्व्यवहार के आरोप साबित हुए। उन्हें 30 से 60 साल की जेल की सजा सुनाई गई।

भारत और दुनिया के मामलों में एक पैटर्न

इन मामलों को साथ रखने पर एक बात साफ दिखाई देती है। कई मामलों में आरोपी कोच, डॉक्टर या ट्रेनर जैसे भरोसे और अधिकार वाले पदों पर थे। यानी खिलाड़ी और खासकर नाबालिग खिलाड़ी अक्सर ऐसे लोगों पर निर्भर होते हैं, जिनके पास उनके करियर, ट्रेनिंग या टीम में जगह को लेकर प्रभाव होता है।

इसी वजह से खेल संस्थाओं में सेफगार्डिंग, शिकायत की स्वतंत्र व्यवस्था, बैकग्राउंड चेक और नाबालिग खिलाड़ियों के साथ कोच-खिलाड़ी संबंधों के स्पष्ट नियम बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

POCSO एक्ट क्या है, बच्चों को यौन अपराधों से बचाने वाला कानून, शिकायत से लेकर सजा तक समझें

ग्रेम डॉट मामले जैसे मामलों में नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों की चर्चा के साथ यह समझना भी जरूरी है कि भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या कानूनी व्यवस्था है। प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रंस फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंस यानी POCSO 2012 में लागू किया गया था। यह 18 साल से कम उम्र के सभी बच्चों को यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी से सुरक्षा देता है। कानून में बच्चे के लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है।

खेल अकादमी में बच्चे की सुरक्षा, दाखिला लेने से पहले इन 5 बातों की जांच करें

खेलों में बच्चे लंबे समय तक कोच, ट्रेनर, फिजियो और दूसरे सपोर्ट स्टाफ के संपर्क में रहते हैं। इसलिए किसी अकादमी में दाखिला कराने से पहले सिर्फ उसकी ट्रेनिंग और सुविधाएं देखना काफी नहीं है। बच्चों की सेफगार्डिंग पॉलिसी के बारे में जानकारी लेना भी जरूरी है।

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