Saturday, August 8, 2026
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बेकाबू होता जा रहा है AI, फेक प्रोफाइल बनाकर साइबर फ्रॉड की कोशिश


AI मॉडल्स अब हाथ से निकलते जा रहे हैं। इसकी वजह से लोगों की नौकरियां तो जा ही रही थी। अब एआई मॉडल ने सिस्टम में सेंध लगाना शुरू कर दिया है। हाल में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा के एक एआई मॉडल ने टेस्टिंग के दौरान सिस्टम में सेंध लगा दिया। इसने लोगों के फर्जी प्रोफाइल बनाकर साइबर फ्रॉड करने की कोशिश की। इससे पहले भी Anthropic और ChatGPT वाली कंपनी OpenAI के मॉडल ने भी ऐसी कोशिश की थी।

बेकाबू होते जा रहें एआई मॉडल

रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा के एआई मॉडल को टेस्टिंग के दौरान इंटरनेट का एक्सेस मिल गया, जिसके बाद इसने दूसरी कंपनी के सिस्टम में जाकर सुरक्षा खामी का फायदा उठा लिया और सेंधमारी की कोशिश की है। मेटा ने बताया कि कंपनी की इंडिपेंडेंट टेस्टिंग पार्टनर Irregular की एक गलत कन्फिगरेशन की वजह से एआई मॉडल को टेस्टिंग के दौरान इंटरनेट का एक्सेस मिल गया।

Irregular ने अपने स्टेटमेंट में बताया कि यह टेस्टिंग एनवायरोमेंट की समस्या की वजह से एआई मॉडल को ओपन इंटरनेट एक्सेस मिल गया था, जिसके बाद तीन अलग-अलग संगठनों के सिस्टम तक पहुंच बन गई थी। हालांकि, कंपनी ने यह साफ किया था कि यह Sandbox Escape  या कोई साइबर अटैक नहीं था।

इंटरनल सिस्टम में घुसने की कोशिश

वहीं, एक और रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा के एआई मॉडल ने एक अज्ञात कंपनी के सिस्टम में घुसकर उसके इंटरनल सिस्टम में कुछ बदलाव कर दिए। इसके बाद कंपनी ने इस घटना की जांच शुरू की है। इसके अलावा ब्रिटेन के AI सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट (AISI) की साइबर सिक्योरिटी टेस्टिंग के दौरान दुनिया के एडवांस एआई मॉडल्स ने ऐसा बर्ताव किया, जिसने एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है। इसने बिना किसी कमांड मिले ही खुद की फर्जी ऑनलाइन पहचान बनाई है और असली लोगों व सगंठनों से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की। हालांकि, जांच के दौरान इन एक्टिविटी को समय रहते रोक दिया गया।

इन मामलों के अलावा Anthropic Mythos 5 AI मॉडल ने साइबर सिक्योरिटी चैलेंज के दौरान AI को GitHub तक पहुंच बनाने का काम दिया गया था लेकिन इसने प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई और फर्जी प्रोफाइल बनाकर मैलेशियस कोड को मंजूरी दिलाने की कोशिश की है।

भारत में AI डीपफेक से जुड़े नियमों को और भी सख्त बना दिए गए हैं। इसकी वजह से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्हें डीपफेक की शिकायत मिलने पर पहले के मुकाबले 12 गुना तेजी से कार्रवाई करनी होगी।

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