Wednesday, July 29, 2026
Homeव्यापारIndia PMI Data: जुलाई में 4 साल के निचले स्तर पर पहुंची...

India PMI Data: जुलाई में 4 साल के निचले स्तर पर पहुंची सर्विस सेक्टर की रफ्तार, जानें वजह


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • भारतीय सेवा क्षेत्र की वृद्धि जुलाई में 53.1 तक घटी.
  • बढ़ती महंगाई और इनपुट लागतें गिरावट का मुख्य कारण.
  • PMI 50 से ऊपर, पर वृद्धि दर अभी धीमी.

India PMI Data: भारत के सर्विस सेक्टर की रफ्तार जुलाई 2026 में धीमी पड़ गई है. इस दौरान भारत का HSBC फ्लैश सर्विसेज PMI गिरकर 53.1 पर आ गया है, जो फरवरी 2022 के बाद सबसे निचला स्तर है. बढ़ती महंगाई के साथ इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी इसकी बड़ी वजह है.

हालांकि, इंडेक्स का 50 से ऊपर रहना इस बात का संकेत है कि भारत की सर्विस इकॉनमी बढ़ तो रही है, लेकिन बहुत धीमी रफ्तार से. जुलाई के आंकड़ों को नजरअंदाज़ करना इसलिए मुश्किल है क्योंकि इसमें तेजी से गिरावट आई है. मई में सर्विस PMI 59.8 था, जिसे ई-कॉमर्स, एंटरटेनमेंट, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और मजबूत घरेलू मांग का सहारा मिला. सिर्फ दो महीनों में इसमें 6.7 पॉइंट की गिरावट आई है. 

यह क्यों है जरूरी?

सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (Services PMI) अर्थव्यवस्था की सेहत को मापने वाला एक महत्वपूर्ण संकेतक है. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत की टोटल जीडीपी में सर्विस सेक्टर का योगदान आधे से ज्यादा है. इस सेक्टर में IT और बैंकिंग से लेकर रेस्टोरेंट, ट्रैवल, ट्रांसपोर्ट और दूसरे कई तरह के बिजनेस शामिल हैं, जिनमें लाखों लोग काम करते हैं. अगर मंदी का दौर लंबा चला, तो इसका असर नौकरियों, लोगों की कमाई और खर्च पर भी दिखेगा.

जुलाई में क्यों कम हुआ PMI?

जुलाई में सर्विस PMI गिरने की कई वजहें हैं जैसे कि महंगाई, इनपुट कॉस्ट में वृद्धि, घरेलू मांग में सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव, जिससे कंपनियों ने मुश्किल हालातों का सामना किया, कई ऑडर्स कैंसिल हुए, सप्लाई चेन में रुकावट आई. लागत भी इस गिरावट की एक बड़ी वजह हो सकती है. ईंधन, लेबर, कच्चा माल और ट्रांसपोर्ट पहले के मुकाबले महंगे हो गए हैं. हालांकि, प्राइवेट सेक्टर्स में एक्सपोर्ट ऑडर्स बढ़े, कंपनियों ने लोगों को काम पर रखना जारी रखा और कुल मिलाकर आउटलुक पॉजिटिव बना रहा.

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, OCBC की सीनियर ASEAN और इंडिया इकोनॉमिस्ट लावण्या वेंकटेश्वरन ने बताया कि शुरुआती नतीजों के आधार पर कुछ पक्का नहीं कहा सकता. उन्होंने कहा, “सर्विसेज PMI का 53.1 का आंकड़ा 50 के स्तर से ऊपर बना हुआ है. स्थिति मिली-जुली है, जिसमें मजबूत मांग की तुलना में कीमतों का बढ़ता दबाव सेंटीमेंट को कमजोर करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है. 

ये भी पढ़ें:

हर शेयर पर 110717 रुपये का डिविडेंड देगी कंपनी, टाटा ग्रुप से जुड़ा है नाम



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments