भारतीय शेयर बाजार में पिछले 18 महीनों के दौरान विदेशी निवेशकों (FPI) की भारी बिकवाली देखने को मिली है। सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2024 से अप्रैल 2026 के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से ₹4.58 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी की। अगर, बात सिर्फ साल 2026 की जाए तो एफपीआई भारतीय शेयरों से कुल 2.60 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई उभरते बाजारों में इसी तरह का रुझान देखने को मिला है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण रहे। इनमें भूराजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार टैरिफ को लेकर अनिश्चितता, डॉलर के मुकाबले मुद्रा में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय फंड्स द्वारा पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग प्रमुख वजहें हैं। सरकार का कहना है कि इन परिस्थितियों का असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अन्य उभरते बाजारों पर भी पड़ा।
कर्ज बाजार में दिखा उल्टा ट्रेंड
जहां इक्विटी बाजार से बड़ी निकासी हुई, वहीं डेट मार्केट में विदेशी निवेशकों का भरोसा बना रहा। इसी अवधि में विदेशी निवेशकों ने भारतीय डेट मार्केट में ₹72,701 करोड़ का शुद्ध निवेश किया। इससे साफ है कि निवेशकों ने पूरी तरह भारत से दूरी नहीं बनाई, बल्कि निवेश का तरीका बदला।
अब फिर लौट रहा विदेशी निवेश
सरकार के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में स्थिति पहले से बेहतर दिखाई दे रही है। 13 जुलाई 2026 तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में ₹25,807 करोड़ का शुद्ध निवेश किया है। वहीं डेट मार्केट में भी ₹56,694 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया है। इससे संकेत मिलते हैं कि विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे वापस लौट रहा है।
घरेलू निवेशकों ने संभाला बाजार
सरकार ने यह भी बताया कि इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को मजबूत सहारा दिया। म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, पेंशन फंड और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) लगातार निवेश बढ़ा रहे हैं। जून 2021 में जहां म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹33.67 लाख करोड़ था, वहीं जून 2026 तक यह बढ़कर ₹82.22 लाख करोड़ पहुंच गया। सरकार का मानना है कि घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भारतीय शेयर बाजार को पहले से अधिक मजबूत और स्थिर बना रही है।
इनपुट- ANI


