Saturday, June 27, 2026
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मुहर्रम का नाम बवालियों ने किया बदनाम, बिहार में चली गोली, यूपी से एमपी तक आयी डरावनी तस्वीरें


मुहर्रम… यानी गम, सब्र और कुर्बानी की याद का दिन. हर साल इस मौके पर शिया मुसलमान हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातमी जुलूस निकालते हैं, ताजिये उठाते हैं और अपने तरीके से गम का इजहार करते हैं. लेकिन अफसोस, इस बार भी देश के कई हिस्सों में मातम का यह पर्व हादसों और हिंसा की वजह से असली शोक में बदल गया. कहीं हाईटेंशन लाइन से ताजिया टकराने पर लोगों की जान चली गई, कहीं मामूली विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया और कहीं धार्मिक आयोजन के नाम पर ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने प्रशासन और समाज दोनों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया.

पुलिस ने निकाला फ्लैग मार्च

देश के कई शहरों में मुहर्रम के जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से निकले. रांची, मुरादाबाद और मुंबई में हजारों लोगों ने मातमी जुलूस निकालकर हजरत इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि दी. वहीं प्रयागराज, संभल और दिल्ली जैसे संवेदनशील इलाकों में पुलिस ने पहले से फ्लैग मार्च निकालकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की ताकि किसी तरह का तनाव पैदा न हो, लेकिन इन तैयारियों के बावजूद कुछ राज्यों से ऐसी खबरें आईं जिन्होंने पूरे देश को झकझोर दिया.

मुहर्रम पर दरभंगा में विवाद

सबसे सनसनीखेज घटना बिहार के दरभंगा में हुई, जहां मुहर्रम के दौरान मामूली विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया. आरोप है कि इमामबाड़े के पास सुनील सहनी नाम के व्यक्ति ने गोली मारकर ट्यूबलाइट बुझा दी. इसका विरोध मोहम्मद मोबिन ने किया, जो बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं. दोनों के बीच कहासुनी हुई और फिर आरोपों के मुताबिक सुनील ने मोबिन के पेट में गोली मार दी. इसके बाद हालात बेकाबू हो गए और मोबिन के समर्थकों ने धारदार हथियार से सुनील सहनी की हत्या कर दी. एक धार्मिक आयोजन के दौरान हुई यह हिंसा कई सवाल छोड़ गई कि आखिर इतना बड़ा विवाद कैसे और क्यों हुआ.

एमपी में मुहर्रम का जुलूस हादसे में बदला

उधर मध्य प्रदेश के रतलाम में मुहर्रम का जुलूस एक बड़े हादसे में बदल गया. बैंड-बाजे के साथ निकले ताजिये की ऊंचाई इतनी ज्यादा थी कि वह हाईटेंशन बिजली लाइन से टकरा गया. बिजली का तेज करंट फैलते ही वहां अफरा-तफरी मच गई. दस से ज्यादा लोग झुलस गए और अस्पताल में इलाज के दौरान रशीद, हुसैन और अरबाज की मौत हो गई. चश्मदीद बिजली विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार बता रहे हैं, जबकि पुलिस ताजिये की अधिक ऊंचाई को भी हादसे की बड़ी वजह मान रही है.

यूपी में हाईटेंशन तार से टकराया ताजिया

उत्तर प्रदेश के एटा में भी लगभग ऐसा ही दृश्य सामने आया. यहां भी ऊंचा ताजिया हाईटेंशन लाइन से टकरा गया और कई लोग करंट की चपेट में आ गए. आठ लोग गंभीर रूप से झुलसे, जिनमें सैफ की इलाज के दौरान मौत हो गई. इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर हर साल चेतावनियों के बावजूद बिजली लाइनों और जुलूसों के बीच सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं हो पाता.

ऐसे हादसों से बचने के लिए उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में पुलिस ने इस बार एक अलग अभियान चलाया. एसपी ग्रामीण अनुज चौधरी खुद पुलिसकर्मियों के साथ इंची टेप लेकर ताजियों की ऊंचाई मापने निकले ताकि कोई भी ताजिया बिजली की लाइनों से टकराने लायक ऊंचाई का न हो. हालांकि यह अभियान सुरक्षा के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें वायरल होने के बाद विवाद भी खड़ा हो गया. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि ताजिये की ऊंचाई मापते समय अधिकारी ने जूते नहीं उतारे, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं.

उज्जैन में कार को उड़ाया

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर से भी एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया. मुहर्रम के दौरान क्रेन की मदद से एक कार को विस्फोटक लगाकर उड़ाया गया. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शोएब, जाहिद और तस्लीम नाम के आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनका जुलूस भी निकाला. इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं और कुछ नेताओं ने आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने की मांग की.

इन घटनाओं के बीच एक बड़ा सवाल बार-बार सामने आ रहा है. चाहे कांवड़ यात्रा हो या ताजिये का जुलूस, प्रशासन हर साल ऊंचाई और सुरक्षा के नियम तय करता है. इसके बावजूद कई जगह इन नियमों की अनदेखी क्यों होती है? क्या धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा मानकों का पालन करना भी उतना ही जरूरी नहीं है जितना धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना?

सीएम योगी ने दिए सख्त संदेश

इसी संदर्भ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मुहर्रम के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश दिया. उन्होंने साफ कहा कि सभी को अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी भी स्थिति में कानून और सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा. प्रशासन की प्राथमिकता यही है कि धार्मिक आयोजन श्रद्धा और शांति के साथ संपन्न हों, न कि हिंसा या हादसों की वजह बनें.

मुहर्रम का संदेश कुर्बानी, इंसाफ और सब्र का है. लेकिन जब धार्मिक आयोजन हिंसा, लापरवाही या कानून की अनदेखी की वजह से हादसों में बदल जाते हैं, तो सबसे बड़ा नुकसान उसी संदेश का होता है, जिसे याद करने के लिए यह पर्व मनाया जाता है. इसलिए जरूरी है कि आस्था के साथ-साथ सुरक्षा और कानून दोनों का भी उतना ही सम्मान किया जाए, ताकि मातम का यह पर्व किसी परिवार के लिए हमेशा का मातम बनकर न रह जाए.



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