Tuesday, June 16, 2026
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भारत पर फिर मेहरबान हुए विदेशी निवेशक! जून में बॉन्ड मार्केट में डाले ₹17,000 करोड़, 16 महीने बाद आया ऐसा मौका


भारत के बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी ने वित्तीय बाजारों में नई उम्मीद जगा दी है। लंबे समय तक दूरी बनाए रखने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने जून महीने में भारतीय सरकारी बॉन्ड्स में जोरदार खरीदारी की है। महज कुछ कारोबारी दिनों में ही उन्होंने करीब 17,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। सरकार द्वारा टैक्स में दी गई बड़ी राहत और वैश्विक परिस्थितियों में सुधार के चलते भारत एक बार फिर विदेशी निवेशकों की पसंद बनता नजर आ रहा है।

जून 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड बाजार में करीब 1.84 अरब डॉलर (करीब 17,000 करोड़ रुपये) का निवेश किया है। यह पिछले 16 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश माना जा रहा है। इससे पहले मार्च 2025 में विदेशी निवेशकों ने लगभग 3.69 अरब डॉलर का निवेश किया था। दिलचस्प बात यह है कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में विदेशी निवेशकों ने केवल 2.07 अरब डॉलर के बॉन्ड खरीदे थे, जबकि चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों अप्रैल और मई में यह आंकड़ा सिर्फ 130 मिलियन डॉलर रहा था।

सरकार के फैसले ने बदली तस्वीर

विदेशी निवेशकों की वापसी के पीछे सबसे बड़ा कारण केंद्र सरकार का हालिया फैसला माना जा रहा है। सरकार ने 6 जून को सरकारी बॉन्ड्स में विदेशी निवेश पर लगने वाला लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स खत्म कर दिया। इसके साथ ही ब्याज आय पर लगने वाला विदहोल्डिंग टैक्स भी हटा दिया गया। पहले विदेशी निवेशकों को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 फीसदी, शॉर्ट टर्म गेन पर 30 फीसदी और ब्याज आय पर करीब 20 फीसदी टैक्स देना पड़ता था। टैक्स हटने से भारतीय बॉन्ड्स की आकर्षकता काफी बढ़ गई है।

रुपये और बॉन्ड यील्ड को मिला सहारा

विदेशी निवेश बढ़ने का असर भारतीय मुद्रा और बॉन्ड बाजार पर भी दिखाई दिया है। जून महीने में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 1 फीसदी मजबूत हुआ है। वहीं, 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 7 फीसदी से घटकर 6.87 फीसदी तक आ गई है। इससे सरकार के लिए कर्ज जुटाने की लागत कम होगी और वित्तीय स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी।

भारत में आ सकता है और बड़ा विदेशी पैसा

मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि टैक्स छूट और अन्य सुधारों की वजह से अगले दो वर्षों में भारतीय बॉन्ड बाजार में 45 से 50 अरब डॉलर तक का विदेशी निवेश आ सकता है। रिजर्व बैंक ने भी FAR के तहत अधिक सरकारी प्रतिभूतियों को शामिल कर निवेशकों के लिए रास्ता आसान बनाया है।





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