दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने 5041 करोड़ रुपये की एक खास योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत दिल्ली-एनसीआर में पुराने ट्रकों और बसों को बदलकर BS-VI और इलेक्ट्रिक गाड़ियां लाई जाएंगी। इस योजना के तहत, पुरानी गाड़ियां बदलकर नई BS-VI और इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने वाले मालिकों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा। बुधवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी।
लोन पर मिलेगी 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी
योजना के तहत केंद्र सरकार 5 साल के लिए लोन पर 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, गाड़ियों की श्रेणी के आधार पर 5 साल तक 4800 रुपये तक के मंथली फ्यूल वाउचर, कंपनियों की तरफ से छूट और इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने के लिए एकमुश्त लाभ प्रदान करेगी। ये योजना दिल्ली-एनसीआर में रजिस्टर्ड BS-IV और उससे पुराने ट्रकों और बसों के लिए ही लागू होगी।
BS-VI की तुलना में 67% ज्यादा कार्बन मोनोऑक्साइड छोड़ती हैं BS-I से BS-IV तक की गाड़ियां
सरकार के बयान के मुताबिक, इस योजना का लक्ष्य दिल्ली-एनसीआर में अभी चल रहे 1.9 लाख से ज्यादा ट्रक और 16,000 बसों को शामिल करना है। बताते चलें कि दिल्ली-एनसीआर की हवा को प्रदूषित करने में क्षेत्र के ट्रकों और बसों की बड़ी हिस्सेदारी है। सरकार ने बताया कि BS-I से BS-IV तक की गाड़ियां, BS-VI गाड़ियों के मुकाबले 67% ज्यादा कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और 97% ज्यादा पार्टिकुलेट मैटर (PM) छोड़ती हैं। इसलिए, गाड़ियों के फ्लीट को आधुनिक बनाना, हवा की क्वालिटी को बेहतर बनाने की कोशिशों का एक अहम हिस्सा है।
ऑटो इंडस्ट्री ने सरकार की योजना का किया स्वागत
ऑटो इंडस्ट्री ने सरकार की इस योजना को एक ‘सकारात्मक कदम’ बताया है, जो स्वच्छ वाहनों को अपनाने में तेजी ला सकती है और प्रदूषण के स्तर को कम करने में मदद कर सकती है। ऑटो कंपनियों के संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने कहा, ”दिल्ली-एनसीआर में पर्यावरण अनुकूल गाड़ियों को अपनाने की गति बढ़ाने की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम है।”
वायु प्रदूषण से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
वीई कमर्शियल व्हीकल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ बी. श्रीनिवास ने कहा, ”हम दिल्ली-एनसीआर के लिए इस योजना को मंजूरी देने के लिए सरकार की सराहना करते हैं। ये ट्रकों और बसों के बेड़े के आधुनिकीकरण में तेजी लाने के साथ-साथ क्षेत्र की सबसे गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक वायु प्रदूषण से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”


