Wednesday, May 6, 2026
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₹23,437 करोड़ की लागत वाली 3 रेल परियोजनाओं को मिली कैबिनेट की मंजूरी, इन 6 राज्य के 19 जिलों को मिलेगा फायदा


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने मंगलवार को रेल मंत्रालय की लगभग 23,437 करोड़ रुपये लागत वाली 3 परियोजनाओं को मंजूरी दे दी। इन परियोजनाओं में नागदा-मथुरा, गुंतकल-वाडी और बुरहवाल-सीतापुर सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। एक सरकारी प्रेस नोट के मुताबिक, रेल लाइनों की बढ़ी हुई क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। इन मल्टी-लाइन परियोजनाओं से संचालन सुगम होगा और भीड़भाड़ में कमी आएगी। 

भीड़भाड़ वाले रेल रूट का हिस्सा हैं ये रेल सेक्शन

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ये रेल सेक्शन भीड़भाड़ वाले रेल रूट का हिस्सा हैं और नई लाइनें प्रमुख शहरों और कस्बों के बीच परिचालन को ज्यादा सुगम बनाएंगी। सरकार ने कहा कि ये परियोजनाएं ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के तहत बहु-स्तरीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं, जिससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी। मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों को कवर करने वाली इन परियोजनाओं से भारतीय रेल नेटवर्क में करीब 901 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। इससे लगभग 4,161 गांवों की करीब 83 लाख आबादी को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। 

महाकाल, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा, वृंदावन जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी

इन परियोजनाओं से महाकालेश्वर मंदिर, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, कूनो राष्ट्रीय उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा, वृंदावन और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों की संपर्क सुविधा भी बेहतर होगी। माल ढुलाई के लिहाज से ये रेल मार्ग कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, इस्पात, लौह अयस्क, कंटेनर और उर्वरक जैसे उत्पादों की ढुलाई के लिए अहम हैं। क्षमता बढ़ने से सालाना 6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की संभावना है। रेल मंत्री ने इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय लाभों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे तेल आयात में करीब 37 करोड़ लीटर की कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन में 185 करोड़ किलोग्राम की कमी होगी, जो करीब 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। 





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