Tuesday, May 5, 2026
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बॉक्स ऑफिस की तरह EVM के भी किंग बने थलापति विजय, दिखा 50 साल पुराना नजारा, पहले ही तोड़ चुके MGR का ये रिकॉर्ड


थलापति विजय ने तमिलनाडु चुनाव 2026 के नतीजे सामने आने के बाद साबित कर दिया कि वह केवल बॉक्स ऑफिस ही नहीं बल्कि ईवीएम का भी किंग बन गए हैं.  तमिलनाडु चुनाव 2026 में एक्टर की पार्टी टीवीके 107 सीटों पर जीत दर्ज कर रही है. इसने सूबे की दमदार पुरानी पार्टियों डीएमके और एडीएमके तक को बड़ी टक्कर दी है. थलापति विजय को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि वह तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं. ऐसे में इस नजारे को देखकर माना जा रहा है कि उन्होंने एमजीआर के समय की याद दिला दी है. 

4 दशकों तक कायम रहा MGR का रिकॉर्ड 

थलापति विजय की इस ऐतिहासिक जीत की तुलना एमजीआर से की जा रही है. दोनों ही फिल्म इंडस्ट्री के सुपस्टार्स हैं. एमजी रामचंद्रन ने 1969 एक रिकॉर्ड बनाया था, जो करीब 4 दशकों तक कायम रहा था. 1969 में एक्टर की फिल्म ‘अदिमाई पेन’ को रिलीज किया गया था, जिसने किसी भी तमिल फिल्म के इतिहास में सबसे ज्यादा ओपनिंग की थी. इस फिल्म को एमजीआर ने ही डायरेक्ट किया था और एक्टिंग भी थी.

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थलापति विजय ने तोड़ा था एमजीआर का रिकॉर्ड

बॉक्स ऑफिस पर एमजीआर के इस रिकॉर्ड को तोड़ने में करीब 35 साल का वक्त लग गया था. थलापति विजय ने इसे  साल 2004 में तोड़ा था. उस साल अभिनेता की फिल्म ‘घिल्ली’ आई थी, जो महेश बाबू की तेलुगु ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘ओक्कडू’ (2003) का तमिल रीमेक थी. ये 200 दिनों से ज्यादा समय तक सिनेमाघरों में चली थी और रिपोर्ट्स के अनुसार, इसका इंडिया नेट कलेक्शन 500 करोड़ रुपये था. इस जादुई आंकड़े को पार करने वाली ये पहली तमिल फिल्म थी. इसी फिल्म ने एमजीआर की फिल्म का रिकॉर्ड तोड़ा था और उस समय अभिनेता 29 साल के थे.

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एमजी रामचंद्रन की राह पर विजय?

एमजी रामचंद्रन ने डीएमके से अलग होकर 1972 में एआईएडीएमके की स्थापना की थी और वह मुख्यमंत्री बने थे. जब उन्होंने पार्टी की स्थापना की थी तो अन्य राजनीतिक दलों ने माना था कि उनकी पार्टी टिक नहीं पाएगी लेकिन अपने अभिनेता होने की लोकप्रियता की पावर राजनीति में दिखाई थी और बंपर जीत हासिल की थी और तीन कार्यकाल तक सत्ता पर काबिज रहे थे. वहीं, थलापति विजय भी अब उसी राह पर हैं. वह इतिहास को दोहराते दिख रहे हैं. उनकी पार्टी टीवीके को बने हुए महज दो साल का ही वक्त हुआ है. उनकी पार्टी के पास ना तो कोई गठबंधन था और ना ही कोई वोट बैंक. फिर भी उन्होंने राजनीति में शानदार शुरुआत की है.



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