केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने शनिवार को कहा कि अगर मिडिल-ईस्ट में चल रहा युद्ध जारी रहा, तो इसका असर भारत के अन्य देशों को होने वाले निर्यात पर भी पड़ेगा। ‘चिंतन शिविर-फार्मा निर्यात वृद्धि’ के अवसर पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण पिछले महीने आयात और निर्यात दोनों पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ा, क्योंकि ऊर्जा भारतीय आयात बाजार का एक प्रमुख हिस्सा है। अधिकारी ने कहा, “पश्चिम एशिया भी एक महत्वपूर्ण बाजार है। हमारे निर्यात का लगभग 12-13 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में जाता है। इसलिए, इस पर सीधा असर पड़ेगा।”
कुछ हफ्तों में स्पष्ट होगा युद्ध का वास्तविक प्रभाव
अधिकारी ने कहा, ”अगर ये स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो संभवतः दुनिया के अन्य हिस्सों में होने वाले हमारे निर्यात भी प्रभावित होंगे क्योंकि कुछ मूल्य श्रृंखलाएं फिर से सामान्य स्थिति में आ जाएंगी। हम इस बात से अवगत हैं।” एक सवाल का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि इस संकट का वास्तविक प्रभाव आने वाले कुछ हफ्तों में स्पष्ट हो सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार कोशिश कर रही है कि आपूर्ति श्रृंखला पर कम से कम असर पड़े, हालांकि आयात और निर्यात दोनों में कुछ कमी आ सकती है।
कुछ महीनों या सालों तक भी बना रह सकता असर
केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने ये भी कहा कि भले ही युद्ध समाप्त हो जाए, लेकिन इसका असर कुछ महीनों या सालों तक भी बना रह सकता है और ये इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सी आपूर्ति श्रृंखला या ढांचा प्रभावित हुआ है। अग्रवाल के अनुसार, इन चुनौतियों से निपटने के लिए उद्योग को आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने बताया कि दवा क्षेत्र पर भी कुछ असर पड़ा है, खासकर जरूरी कच्चे माल और रसायनों की आपूर्ति पर। उन्होंने कहा कि सरकार एलपीजी की सीमित उपलब्धता को प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में बांटने के लिए काम कर रही है और जरूरत पड़ने पर अन्य स्रोतों से आयात भी किया जा रहा है।


