भारतीय शेयर बाजार के लिए मार्च 2026 किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। पूरे महीने बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा, जिसने निवेशकों की कमर तोड़ दी। हालात ऐसे रहे कि सेंसेक्स और निफ्टी में मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट में निवेशकों के करीब ₹44.62 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
30 मार्च को भी बाजार में गिरावट थमने का नाम नहीं लिया। सेंसेक्स 1,635 अंक टूटकर 71,947 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488 अंक गिरकर 22,331 पर आ गया। यह निफ्टी का अप्रैल 2025 के बाद सबसे निचला स्तर है।
6 साल का सबसे खराब प्रदर्शन
मार्च महीना बाजार के लिए बेहद खराब साबित हुआ। निफ्टी-50 में करीब 11% से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि बैंक निफ्टी लगभग 17% टूट गया। तिमाही आधार पर भी हालात चिंताजनक रहे, जहां निफ्टी और बैंक निफ्टी दोनों में 14-15% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट कोविड काल के बाद सबसे खराब मानी जा रही है।
डर का माहौल, VIX में जोरदार उछाल
बाजार में डर का माहौल साफ नजर आया। फियर इंडेक्स कहे जाने वाले इंडिया VIX में जबरदस्त उछाल देखने को मिला, जो निवेशकों की बढ़ती घबराहट को दिखाता है। इसका मतलब है कि बाजार में अनिश्चितता और खतरा काफी बढ़ गया है।
क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने ग्लोबल मार्केट को हिला दिया है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया। कमजोर ग्लोबल संकेतों ने भी बाजार की शुरुआत से ही माहौल खराब रखा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को घबराने के बजाय सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत है।


