Sunday, March 29, 2026
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चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर BJP में क्यों जा रहा नेता? राहुल गांधी के करीबी ने बताई वजह, जानें क्या कहा


कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जा रहे नेताओं के मुद्दे को लेकर राहुल गांधी के करीबी ने इस बारे में पूरी सच्चाई बता दी है. कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने शनिवार को कहा कि पार्टी के कई नेताओं ने अपने राज्यों में जीतने की कमी के चलते दूसरी अन्य पार्टियों का दामन थाम लिया है. इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर तंज कसा है. उन्होंने कहा है कि उनके पास कांग्रेस के नेताओं को लेने के लिए बहुत सारी सीटें हैं. 

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि सीनियर नेताओं ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से दूरी बना ली थी. साथ ही उन्होंने इस बात को भी खारिज कर दिया है, जिनमें नेताओं के पार्टी छोड़ने की वजह निजी मनमुटाव होना है. इस तरह के फैसलों के पीछे उन्होंने सिर्फ राजनीतिक बताया है. 

राहुल गांधी का इनसे रिश्ता सिर्फ राजनैतिक है: मणिकम टैगोर

उन्होंने कहा कि ये नेता जो यह दिखाना चाहते थे कि वे राहुल गांधी के बेहद ही करीब हैं, जहां भी कैमरा होता था, वे वहीं नजर आते थे. फिर भी सभी दिल्ली में रसूखदार लोग हैं. राहुल गांधी का इन लोगों से दोस्ती सिर्फ एक राजनीतिक रिश्ता है. वे इसलिए चले गए क्योंकि उनकी सीटों पर उनकी जीतने की क्षमता कम बची थी. वे सभी चले गए क्योंकि वे अपनी सीटें जीतने में सक्षम नहीं थे. 

इसके अलावा उन्होंने 2019 और 2024 में मिली हार को लेकर कहा है कि हाल ही में असम के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा और मौजूदा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस से नाराजगी जताते हुए पार्टी छोड़ दी है. वे बीजेपी में शामिल हो गए हैं. बीजेपी का कांग्रेस के कई पूर्व नेताओं को शामिल करना एक पीआर चाल थी. इसका मकसद नैरेटिव बनाना था कि जो लोग राहुल गांधी के करीब हैं, वे भी पार्टी छोड़ रहे हैं. वे सिर्फ दिल्ली सेंट्रिक लोग थे, ग्रेटर कैलाश और ऐसे ही अन्य इलाके के लोग थे. वे दिल्ली में रहते थे, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, और अन्य राज्यों से चुनाव लड़ते थे. वह सभी दूसरी पार्टियों में चले गए. बीजेपी एक ऐसी पार्टी है, जो खाली कुर्सियों से भरी पड़ी है. 

राहुल गांधी के दोस्त आम लोग हैं: टैगोर

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के दोस्त आम लोग हैं. राहुल गांधी उनकी परवाह करते हैं. इसके अलावा तमिलनाडु में कांग्रेस के घटते जनाधार को भी उन्होंने स्वीकार किया है. हम 20 प्रतिशत पर थे, जो घटकर 5 प्रतिशत पर आ गए. हमने जमीन खो दी है. हम यह बात समझते हैं. इसके अलावा उन्होंने 1996 में नरसिम्हा राव के एक फैसले का जिक्र किया. इसमें कहा गया कि उस फैसले का असर बड़ा पड़ा है. टीएमसी (तमिल मनीला कांग्रेस) पार्टी से अलग हो गई थी. उसने कांग्रेस के वोट अपने पाले में कर लिए थे. करीबन 12 से 15 प्रतिशत वो हासिल कर लिए ते. जव वे वापस लौटे तो उनके पास सिर्फ 5 प्रतिशत वोट ही बचे थे. तमिल मनीला कांग्रेस की स्थापना 1996 में राज्यसभा के पूर्व सांसद जीके मूपनार ने की थी. 

यह भी पढ़ें: उदयनिधि, स्टालिन, OPS, सेंथिल बालाजी… तमिलनाडु में DMK ने जारी की उम्मीदवारों की पहली लिस्ट



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