Thursday, March 19, 2026
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Bengal Election 2026: ‘डबल स्कैम’ बनाम ‘SSC घोटाला’ की सियासी जंग! उम्मीदवार सूची पर TMC-BJP आमने-सामने


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासत एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप के दौर में प्रवेश कर चुकी है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच उम्मीदवार सूची को लेकर नई राजनीतिक जंग छिड़ गई है. दोनों दल सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गर्म होता दिख रहा है.

TMC ने अपने आधिकारिक पोस्ट में सुवेंदु अधिकारी को लेकर पुराने घोटालों का जिक्र किया. पोस्ट में कहा गया कि वह नेता ‘नारदा स्टिंग ऑपरेशन में कैमरे पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए थे. शारदा प्रमुख सुदीप्तो सेन ने अपने विस्फोटक पत्र में उनका नाम लेते हुए करोड़ों रुपये के अवैध गबन का आरोप लगाया था.’ इसके साथ ही पोस्ट में आरोपों को दोहराते हुए कहा गया, ‘नारदा घोटाला. शारदा घोटाला. डबल घोटाला. डबल टिकट. इस बयान को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि पश्चिम बंगाल की राजनीति में नारदा और शारदा जैसे घोटाले लंबे समय से चुनावी विमर्श का हिस्सा रहे हैं. चुनाव से पहले इन मुद्दों को फिर से उठाना सियासी रणनीति का संकेत माना जा रहा है.

BJP का वार

वहीं भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने तृणमूल की उम्मीदवार सूची को लेकर भर्ती घोटाले का मुद्दा उठाया. भाजपा ने अपने पोस्ट में कहा, ‘तृणमूल की उम्मीदवार सूची की शुरुआत ही SSC घोटाले से होती है. नौकरियां छीनो, शिक्षकों को बेरोजगार बनाओ और फिर TMC से टिकट पाओ. यहां तक कि उनकी बेटी की अवैध नौकरी भी कलकत्ता हाई कोर्ट ने रद्द कर दी. यही है मेकलिगंज से उम्मीदवार परेश अधिकारी की छोटी-सी कहानी.’ भाजपा के इस बयान ने रोजगार और भ्रष्टाचार के मुद्दे को चुनावी बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की है. पश्चिम बंगाल में SSC भर्ती विवाद पिछले कुछ समय से राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रहा है, जिसने राज्य की राजनीति में बड़ा असर डाला है.

सोशल मीडिया पर वार

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों दलों के बीच यह सियासी टकराव केवल एक उम्मीदवार तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी नैरेटिव को प्रभावित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. तृणमूल जहां पुराने घोटालों को मुद्दा बनाकर विपक्ष की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना चाहती है, वहीं भाजपा रोजगार और भर्ती से जुड़े मामलों को जनता के बीच प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाना चाहती है. यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में चुनावी तैयारियां तेज हो चुकी हैं और उम्मीदवारों के नामों की घोषणा के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो रही है.

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आरोप-प्रत्यारोप चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं और मतदाताओं के बीच राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ा सकते हैं. अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में यह सियासी जंग किस दिशा में जाती है और क्या यह मुद्दे वास्तव में मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित करेंगे या फिर चुनावी बयानबाजी तक सीमित रह जाएंगे. फिलहाल इतना तय है कि बंगाल की राजनीति में चुनाव से पहले आरोपों की यह लड़ाई अभी और तेज होने वाली है.



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