Tuesday, March 17, 2026
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जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अडाणी एंटरप्राइजेज की समाधान योजना को मिली NCLT की मंजूरी, चेक करें डिटेल्स


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Photo:PTI अडाणी को पिछले साल लेनदारों की समिति से मिली थी मंजूरी

अडाणी एंटरप्राइजेज ने मंगलवार को कहा कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए उसकी समाधान योजना को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी की घोषणा 17 मार्च, 2026 को एक मौखिक आदेश के जरिए की गई थी। लिखित आदेश जारी होने के बाद कंपनी इस विषय पर विस्तृत जानकारी देगी। बताते चलें कि अडाणी एंटरप्राइजेज को संकटग्रस्त कंपनी के लिए सफल बोली लगाने वाली फर्म के रूप में चुना गया था। इस समाधान योजना को अडाणी एंटरप्राइजेज, उसकी ग्रुप कंपनियों या विशेष प्रयोजन वाहनों (SPVs) के जरिए लागू किया जा सकता है।

जयप्रकाश एसोसिएट्स ने NCLT की मंजूरी पर क्या कहा

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जयप्रकाश एसोसिएट्स ने NCLT की मंजूरी पर कहा, “सफल समाधान आवेदक के आकलन के अनुसार, परिसमापन मूल्य (liquidation value) सुरक्षित लेनदारों के दावों को पूरी तरह से संतुष्ट करने के लिए भी अपर्याप्त है। इसलिए, स्वीकृत समाधान योजना के तहत डीलिस्टिंग प्रक्रिया के हिस्से के रूप में कॉर्पोरेट देनदार के शेयरधारकों को ‘शून्य’ (NIL) प्रतिफल की पेशकश की जा रही है और इसलिए मौजूदा शेयरधारकों के लिए एग्जिट प्राइस भी ‘शून्य’ है।”

अडाणी को पिछले साल लेनदारों की समिति से मिली थी मंजूरी

19 नवंबर को, अडाणी ग्रुप की कंपनी को जयप्रकाश एसोसिएट्स की लेनदारों की समिति (Committee of Creditors) से मंजूरी मिली थी, जब लेनदारों ने दिवालिया हो चुके इस इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल ग्रुप के लिए उसके समाधान प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। एक रेगुलेटरी फाइलिंग में गौतम अडाणी के नेतृत्व वाली कंपनी ने कहा कि उसे “19 नवंबर, 2025 को दोपहर 3:05 बजे समाधान पेशेवर (RP) से आशय पत्र (LOI) प्राप्त हुआ है।”

जयप्रकाश एसोसिएट्स पर 55,000 करोड़ रुपये का बकाया

जयप्रकाश एसोसिएट्स, जेपी ग्रुप की प्रमुख कंपनी है। इस पर वर्तमान में लेनदारों का लगभग 55,000 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसमें नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी सबसे बड़ी लेनदार है। इसे जून 2024 में दिवालियापन की कार्यवाही में शामिल किया गया था और इसका प्रबंधन डेलॉइट के समाधान पेशेवर भुवन मदन द्वारा किया जा रहा है। जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए 5 कंपनियों के बीच बोली की जंग शुरू हुई थी, जिनमें अडाणी ग्रुप, वेदांता, डालमिया भारत, जिंदल पावर और PNC इंफ्राटेक शामिल थे। शुरुआत में डालमिया भारत सबसे आगे थी, लेकिन उसने बाद में इलेक्ट्रॉनिक नीलामी में हिस्सा नहीं लिया।

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