Wednesday, March 4, 2026
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US-Israel Iran Attacks: चीन ने ईरान को दीं मिसाइलें, जिनका जंग में इस्तेमाल कर रहा मुस्लिम मुल्क, जानें क्या है सच?


मिडिल ईस्ट में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. अमेरिकी और इजरायली हमले के बाद ईरान लगातार अमेरिका के अलग-अलग सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. इस  दौरान वह खतरनाक मिसाइलों का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है. इस बीच अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद चीनी सरकारी मीडिया में यह खबर आई थी कि ईरान की मिसाइलों से अमेरिकी विमान गिराए गए और कुछ नौसैनिक जहाजों को नुकसान हुआ है. इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या ईरान के पास इतनी आधुनिक मिसाइलें चीन से आई हैं. खासकर CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल को लेकर चर्चा तेज हो गई.

कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों से पहले चीन और ईरान के बीच CM-302 मिसाइल बेचने की डील लगभग तय हो गई थी. अगर यह डील पूरी होती तो यह हाल के सालों में चीन की तरफ से ईरान को दी गई सबसे आधुनिक सैन्य तकनीक में से एक होती. हालांकि, चीन ने इन खबरों को साफ तौर पर खारिज कर दिया है. चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि ऐसी किसी डील की बात गलत है. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि चीन एक जिम्मेदार देश है और वह अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करता है. उन्होंने यह भी कहा कि चीन अफवाहों का विरोध करता है और सभी पक्षों से तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाने की अपील करता है.

कई नौसैनिक जहाज ईरान के पास तैनात

इस बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने अभियान के तहत विमानवाहक पोत सहित कई नौसैनिक जहाज ईरान के समुद्री क्षेत्र के पास तैनात किए हैं. अगर ईरान के पास लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलें हैं तो ये जहाज उनके निशाने पर आ सकते हैं. ईरान और चीन के बीच लंबे समय से करीबी संबंध हैं. ईरान चीन को तेल सप्लाई करने वाले बड़े देशों में से एक है. ऐसे में यह भी देखा जा रहा है कि क्या चीन केवल बयान तक सीमित रहेगा या तेहरान की नई नेतृत्व व्यवस्था के साथ अपने संबंध मजबूत रखेगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा

हाल ही में अमेरिका की तरफ से वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने और ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद भी चीन ने बहुत तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी. इससे यह संकेत मिलता है कि चीन अभी संतुलित रुख अपनाए हुए है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 31 मार्च को बीजिंग की यात्रा करने वाले हैं. इस यात्रा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या मौजूदा तनाव के बीच यह योजना आगे बढ़ेगी. माओ निंग ने कहा कि चीन और अमेरिका दोनों देशों के नेताओं के बीच संपर्क बना हुआ है.



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