कर्नाटक में स्कूलों के अंदर बच्चों के मोबाइल फोन इस्तेमाल को लेकर बड़ा मुद्दा खड़ा हो गया है. राज्य के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने साफ किया है कि सरकार इस मामले पर गंभीरता से चर्चा कर रही है. उनका कहना है कि कई देशों में स्कूलों में मोबाइल पर रोक लगाई जा चुकी है और वहां इसके अच्छे नतीजे भी देखने को मिले हैं. वहीं, राज्य के कई अभिभावक भी चाहते हैं कि बच्चों का मोबाइल इस्तेमाल सीमित किया जाए ताकि पढ़ाई पर ध्यान बना रहे.
मोबाइल बैन पर क्या बोले डी.के. शिवकुमार
उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि स्कूलों में मोबाइल फोन के गलत इस्तेमाल की शिकायतें सामने आ रही हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन गलत तरीकों को सार्वजनिक रूप से बताना ठीक नहीं है. इसी वजह से इस मुद्दे पर अंदर ही अंदर विस्तार से चर्चा की जा रही है.उन्होंने बताया कि यह सिर्फ राज्य का मामला नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्कूलों में मोबाइल के उपयोग को लेकर बहस चल रही है. कई देशों ने पढ़ाई पर पड़ रहे असर को देखते हुए मोबाइल फोन पर रोक लगाई है. कर्नाटक सरकार भी ऐसे सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहती है.
16 साल से कम उम्र के बच्चों पर असर
राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने भी इस विषय पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल फोन देने से उनकी पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. बच्चे पढ़ाई से ज्यादा समय मोबाइल पर बिताने लगे हैं.उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर कई देशों में शोध किए गए हैं और वहां मोबाइल बैन लागू किया गया है. मुख्यमंत्री ने भी इस पर चर्चा की है.सरकार फायदे और नुकसान दोनों को समझने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेगी.
कर्नाटक सरकार स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर है. अभिभावकों की चिंता, बच्चों की पढ़ाई पर असर और दूसरे देशों के उदाहरणों को देखते हुए सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है. हालांकि अंतिम निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा. आने वाले समय में इस मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट घोषणा की जा सकती है.
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