वॉशिंगटन डीसीकुछ ही क्षण पहले
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के तीन घंटे बाद ट्रम्प ने प्रेस कांफ्रेंस करके नए टैरिफ का ऐलान किया।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के 3 घंटे के अंदर डोनाल्ड ट्रम्प ने नए टैरिफ का ऐलान कर दिया। ट्रम्प ने सेक्शन 122 का हवाला देते हुए सभी देशों पर टैरिफ का ऐलान किया है।
इस नियम के तहत अधिकतम 15% तक ग्लोबल टैरिफ लगाया जा सकता है लेकिन सिर्फ 150 दिनों के लिए। इसका इस्तेमाल बड़े व्यापार घाटे से निपटने के लिए किया जा सकता है।
फैसले पर ट्रम्प ने कहा कि यह बहुत निराशाजनक है। उन्हें कोर्ट के कुछ जजों पर शर्म आ रही है। वे देश के लिए कलंक हैं, उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है।
इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध बताया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ कांग्रेस (अमेरिकी संसद) को है।

ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल में ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया था। (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रम्प क्या बोले…
- 2024 के चुनाव में मैं लाखों वोटों से जीता। ऐसा लगता है कुछ जजों को इसी बात से डर लगता है कि लोग मेरा इतना सपोर्ट क्यों करते हैं। इसीलिए वे (जज) सही से काम नहीं करना चाह रहे।
- जो विदेशी हमें सालों से लूट रहे हैं, वे बहुत खुश हैं। वे सड़कों पर नाच रहे हैं लेकिन ऐसा ज्यादा देर तक नहीं रहने वाला।
- अमेरिका ने अरबों डॉलर का जो टैरिफ रेवेन्यू लिया है क्या उसे रिफंड करेंगे। इस सवाल का जवाब देते हुए ट्रम्प ने कहा- इस पर कोई बात नहीं हुई है। लगता है ये मामला कोर्ट में ही रहेगा।
कोर्ट की ट्रम्प को फटकार, कहा- हर देश से युद्ध की स्थिति में नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को फटकारते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। हालांकि फैसले को लेकर 3 जजों जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने इस फैसले से असहमति जताई।
कैवनॉ ने अपने नोट में लिखा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन उनके मुताबिक यह कानूनी तौर पर वैध थी। कैवनॉ ने अपने नोट में भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया।
उन्होंने लिखा कि ये टैरिफ विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के तहत लगाए गए थे।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 जज हैं। इनमें से 6 जजों को रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किया है, जबकि 3 जज डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए। फैसले के खिलाफ वोट करने वाले तीनों जज रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए थे।

जस्टिस ब्रेट कैवनॉ को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में 6 अक्टूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया था।
कोर्ट के फैसले से सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए थे
कोर्ट के आदेश से ट्रम्प के सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं। स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए टैरिफ अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे, इसलिए वे अभी भी लागू रहेंगे।
हालांकि, दो बड़े कैटेगरी के टैरिफ पर रोक लग गई है। पहली कैटेगरी रेसिप्रोकल टैरिफ की है, जो ट्रम्प ने अलग-अलग देशों पर लगाए थे। इसमें चीन पर 34% और बाकी दुनिया के लिए 10% बेसलाइन टैरिफ तय किया गया था। कोर्ट के फैसले के बाद ये टैरिफ अमान्य हो गए हैं।
दूसरी कैटेगरी 25% टैरिफ की है, जो ट्रम्प ने कनाडा, चीन और मैक्सिको से आने वाले कुछ सामान पर लगाया था। ट्रम्प प्रशासन का कहना था कि इन देशों ने अमेरिका में फेंटेनाइल की तस्करी रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। कोर्ट के फैसले ने इस 25% टैरिफ को भी निरस्त कर दिया है।

अमेरिका ने टैरिफ से 200 अरब डॉलर वसूले, रिफंड पर सस्पेंस
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल की शुरुआत से अब तक ट्रम्प प्रशासन ने 200 अरब डॉलर से ज्यादा का टैरिफ वसूला है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब इस रकम के रिफंड को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
फैसले के बाद यह साफ नहीं है कि सरकार को कंपनियों को वसूला गया पैसा लौटाना पड़ेगा या नहीं। ट्रम्प प्रशासन ने पहले कहा था कि अगर केस हार गए तो कई देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों को वापस लेना पड़ सकता है और भारी रिफंड चुकाने पड़ सकते हैं।
फैसले की आशंका को देखते हुए कई कंपनियों ने पहले ही वकील रख लिए थे। उन्होंने कोर्ट में मुकदमे दायर किए और टैरिफ के रूप में चुकाई गई रकम के रिफंड के लिए दावे भी दाखिल किए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार को इन कंपनियों को भुगतान करना पड़ेगा। फिलहाल इस पर स्थिति साफ नहीं है।
ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून के इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था
ट्रम्प के टैरिफ विवाद के केंद्र में एक कानून है, जिसका नाम इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) है। यह कानून 1977 में बनाया गया था।
इसका मकसद यह था कि अगर देश पर कोई गंभीर खतरा जैसे युद्ध जैसी स्थिति, विदेशी दुश्मन से बड़ा आर्थिक खतरा या असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट आए तो राष्ट्रपति को कुछ खास शक्तियां दी जा सकें।
इन शक्तियों के तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकता है, उन्हें नियंत्रित कर सकता है या कुछ आर्थिक फैसले तुरंत लागू कर सकता है। ट्रम्प ने टैरिफ लगाने के लिए IEEPA का ही सहारा लिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ पर सवाल उठाए थे
पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प सरकार के टैरिफ लगाने के कानूनी आधार पर सवाल उठाए थे। उस दौरान जजों ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति को इस तरह के ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार है। कोर्ट ने इस मामले में लंबी सुनवाई की।
कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प 150 दिनों तक 15% टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन इसके लिए ठोस कारण चाहिए। फैसले में कहा गया कि IEEPA में ‘टैरिफ’ शब्द का कहीं जिक्र नहीं है और न ही इसमें राष्ट्रपति के अधिकारों पर कोई स्पष्ट सीमा तय की गई है।
ट्रम्प के खिलाफ 12 राज्यों का मुकदमा
ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल इन टैरिफ के ऐलान किए थे। इन टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के कई छोटे कारोबारी और 12 राज्यों ने मुकदमा दायर किया था। उनका कहना था कि राष्ट्रपति ने अपनी सीमा से बाहर जाकर आयात होने वाले सामान पर नए टैरिफ लगाए।
एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट राज्यों ने छोटे कारोबारियों के साथ मिलकर ट्रम्प सरकार के खिलाफ यह केस किया था।

ट्रम्प सरकार ने कोर्ट में दलील दी थी कि टैरिफ हटाने पड़े तो अरबो डॉलर की वसूली वापस करनी पड़ सकती है। इससे अमेरिकी खजाने को बड़ा झटका लगेगा।
निचली अदालतों ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था
इससे पहले निचली अदालतों (कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और फेडरल सर्किट कोर्ट) ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। उनका मानना था कि IEEPA टैरिफ लगाने की इतनी व्यापक शक्ति नहीं देता।
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में मौखिक बहस सुनी थी, जहां जजों ने ट्रम्प की ओर से पेश की गईं दलीलों पर संदेह जताया था। कोर्ट के 6-3 बहुमत के बावजूद, जस्टिस ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा सकता है, क्योंकि टैरिफ टैक्स का रूप हैं और यह संसद की जिम्मेदारी हैं।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया, तो अमेरिका के लिए हालात पूरी तरह बिगड़ सकते हैं। ट्रम्प ने कहा कि ऐसा हुआ तो देश पूरी तरह फंस जाएगा और सब कुछ गड़बड़ हो जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें…



