
गूगल ऐप्स बैन
Google ने 1.75 मिलियन यानी 17.5 लाख से ज्यादा फर्जी ऐप्स पर बड़ा एक्शन लिया है। ये ऐप्स गूगल प्ले स्टोर की पॉलिसी को तोड़ रहे थे। गूगल का यह सख्त कदम एंड्रॉइड इकोसिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए उठाया गया है। गूगल ने अपने आधिकारिक ब्लॉग पोस्ट के जरिए बताया कि ये ऐप्स प्राइवेसी पॉलिसी का उल्लंघन कर रहे ते। इसके अलवा टेक कंपनी ने ऐप बनाने वाले 80 हजार डेवलपर्स के अकाउंट पर भी ताला लगा दिया है।
यूजर्स तक पहुंचने से पहले हुए बैन
गूगल ने अपने ब्लॉग पोस्ट में बताया कि बैन हुए इन हानिकारक ऐप्स में मेलवेयर पाए गए, जो फाइनेंशियल फ्रॉड, हिडन सब्सक्रिप्शन और प्राइवेसी के लिए खतरा बन रहे थे। इससे पहले कि ये ऐप्स यूजर्स तक पहुंच पाते गूगल ने प्ले स्टोर से इन्हें बैन कर दिया है। गूगल प्ले प्रोटेक्शन के AI डिटेक्शन टूल के माध्यम से इन ऐप्स की पहचान की गई और इन्हें ब्लॉक किया गया है।
टेक कंपनी ने 19 फरवरी को पोस्ट किए गए अपने ब्लॉग में बताया कि इन ऐप्स को ब्लॉक करने के साथ-साथ 80 हजार डेवलपर्स के अकाउंट पर भी ताला गया गया है। ये अकाउंट्स कई बार फ्रॉड और बार-बार पॉलिसी तोड़ने में लिप्त पाए गए। गूगल ने अपने सिक्योरिटी ब्लॉग में बताया कि AI टूल के जरिए 2,55,000 ऐप्स को यूजर के सेंसेटिव डेटा चोरी करने से रोका गया।
एंड्रॉइड इकोसिस्टम हुआ सुरक्षित
अमेरिकी टेक कंपनी ने बताया कि 2025 में कंपनी ने एंड्रॉइड इकोसिस्टम को सुरक्षित करने के लिए यह बड़ा एक्शन लिया है। गूगल ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी को सख्त किया है और लगातार प्ले स्टोर पर मौजूद ऐप्स की मॉनिटरिंग की जा रही है। कंपनी ने दावा किया है कि प्ले स्टोर पर मौजूद Android Studio और डेटा सेफ्टी सेक्शन में AI के जरिए मॉनिटरिंग हो रही है।
इसके अलावा गूगल ने अपने एंटी-स्पैम सिस्टम को भी अपग्रेड किया है, जिसकी वजह से 160 मिलियन स्पैम रेटिंग और रिव्यू को भी ब्लॉक करने का भी काम किया गया है। फर्जी रेटिंग के लिए यूजर्स और डेवलपर्स को मिसलीड करने पर यह कार्रवाई की गई है। गूगल का AI पावर्ड रिव्यू सिस्टम अब ऐप को अर्ली डेवलपमेंट फेज में ही एनालाइज कर लेती है। इसके जरिए ऐप में मौजूद मेलवेयर, स्पाइवेयर और फाइनेंशियल स्कैम ऐप्स की पहचान की जाती है।
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