इस्लामाबाद3 घंटे पहले
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(फाइल फोटो)
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में पिछले 24 घंटे में लगातार 7 धमाके हुए हैं। संदिग्ध उग्रवादियों ने क्वेटा और डेरा मुराद जमाली में कई जगहों को निशाना बनाया। धमाकों में किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के दो सुरक्षा गार्ड घायल हो गए।
शनिवार को क्वेटा में पुलिस चेकपोस्ट पर हैंड ग्रेनेड से हमला किया गया। इसके बाद एंटी-टेररिज्म डिपार्टमेंट (ATD) की गाड़ी के पास IED ब्लास्ट हुआ। शाम तक तीन और धमाके हुए।
क्वेटा के SSP आसिफ खान के मुताबिक, सरियाब रोड पर निर्माण कंपनी के कैंप पर हथियारबंद लोगों ने ग्रेनेड फेंके, जिसमें दो गार्ड जख्मी हुए।
मनजूर शहीद पुलिस स्टेशन पर भी मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने दो ग्रेनेड फेंके। इनमें से एक मौके पर फट गया, दूसरा बम स्क्वाड ने निष्क्रिय कर दिया। शहर के बाहरी हिस्से लोहर करेज के पास रेलवे ट्रैक को भी IED ब्लास्ट कर उड़ा दिया।

हमलावरों ने ट्रैक पर बम लगाया और ट्रेन के आने से पहले उसे उड़ा दिया, जिससे रेल सेवाएं रोकनी पड़ीं। (फाइल फोटो)
पुलिस की गाड़ी पर ग्रेनेड से हमला किया
डेरा मुराद जमाली में भी पुलिस की गश्ती गाड़ी पर ग्रेनेड हमला हुआ। क्वेटा के केच बेग इलाके में पुलिस पोस्ट के पास भी हथगोले फेंके गए। किसी भी संगठन ने इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है।
इससे पहले भी बलूचिस्तान में कई बड़े हमले हो चुके हैं। इस साल अब तक 782 लोग मारे जा चुके हैं। मार्च में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक ट्रेन हाइजैक करके कई सैनिकों की हत्या की थी।
सितंबर में क्वेटा में एक राजनीतिक रैली पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी।
4 साल में 4 हजार पाकिस्तानी सैनिक मारे गए
पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार ने कल (शनिवार) को दावा किया था कि बीते 4 साल में पाकिस्तान से 4 हजार सैनिक मारे गए हैं, जबकि 20 हजार से ज्यादा घायल हुए हैं।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता संभालने के बाद पाकिस्तान को बर्दाश्त से ज्यादा नुकसान का सामना कर पड़ा है।
पाकिस्तानी डिप्टी पीएम ने तालिबान से उग्रवादियों पर सख्त कार्रवाई करने की अपील की। डार ने कहा कि पाकिस्तानी तालिबान (TTP) के लड़ाकों को बॉर्डर इलाके में पनाह नहीं दी जानी चाहिए।
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP): पाकिस्तान का विद्रोही संगठन
- 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया, तो कई लड़ाके पाकिस्तान के कबाइली इलाकों में छिप गए।
- 2007 में बेतुल्लाह मेहसूद ने 13 विद्रोही गुटों को मिलाकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) बनाया।
- इसमें बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सेना के विरोधी गुट के लोग शामिल थे।
- इनकी लड़ाई पाकिस्तान की सेना और सरकार के खिलाफ है।
- इस संगठन से जुड़े कई समर्थक पाकिस्तानी सेना में मौजूद हैं।
- अमेरिका ने पाकिस्तान को चेताया है कि TTP एटमी हथियारों तक पहुंच सकता है।

पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों?
- 2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था।
- TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है।
- TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं।
- 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए।
- TTP पश्तून समुदाय की गरीबी, बेरोजगारी और सरकार की अनदेखी जैसी शिकायतों का फायदा उठाता है।
2022 से TTP ने पाकिस्तान पर हमले तेज किए
पाकिस्तान अक्सर आरोप लगाता है कि पाकिस्तानी तालिबान अफगानिस्तान के जमीन का इस्तेमाल करके उस पर आतंकी हमले करता है। हालांकि पाकिस्तान के इन आरोपों को अफगानिस्तान खारिज करता रहा है।
अफगानिस्तान में 2021 के तालिबान की वापसी के साथ ही पाकिस्तानी तालिबान (TTP) मजबूत हुआ है। TTP ने नवंबर 2022 में पाकिस्तान के साथ सीजफायर को एकतरफा तौर पर खत्म कर दिया था। इसके बाद उसने पाकिस्तान पर हमले तेज कर दिए हैं।
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान दूसरे नंबर पर
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 के मुताबिक, बुर्किना फासो के बाद पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे आतंक प्रभावित देश बन चुका है, जबकि 2024 में यह चौथे स्थान पर था।
- TTP के हमलों में 90% की वृद्धि हुई है।
- बलूच आर्मी (BLA) के हमलों में 60% बढ़ोतरी हुई है।
- इस्लामिक स्टेट- खुरासान (IS-K) ने अब पाकिस्तानी शहरों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान सबसे ज्यादा आतंक प्रभावित इलाके हैं। देश भर की कुल आतंकी घटनाओं में से 90% इसी इलाके में हुईं।
रिपोर्ट में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को लगातार दूसरे साल पाकिस्तान का सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन बताया गया। 2024 में इस ग्रुप ने 482 हमले किए, जिसकी वजह से 558 मौतें हुई थीं, जो 2023 के मुकाबले 91% ज्यादा हैं।


