Thursday, January 1, 2026
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2025 में 18 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स पढ़ाई के लिए गए विदेश, 6 लाख स्कूली छात्र भी शामिल



भारत से विदेशों में पढ़ाई करने का रुझान लगातार बढ़ता जा रहा है. सिर्फ कॉलेज या यूनिवर्सिटी ही नहीं, अब बड़ी संख्या में भारतीय परिवार अपने बच्चों को स्कूली स्तर पर भी विदेश भेज रहे हैं. संसद के विंटर सेशन  में विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से जारी किए गए नए आंकड़े यह साफ दिखाते हैं कि दुनिया के देशों में भारतीय छात्रों की उपस्थिति कितनी तेजी से बढ़ रही है और भारत किस तरह वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर एक बड़ी शक्ति बनकर उभर रहा है.

पहली बार मंत्रालय ने स्कूल स्तर के डेटा को भी शामिल किया है, जिससे तस्वीर और भी साफ हो गई है. यह बदलाव इसलिए जरूरी माना जा रहा है क्योंकि अब छात्र गतिशीलता यानी Students Mobility की पूरी और वास्तविक तस्वीर सामने आई है जहां पहले सिर्फ कॉलेज या यूनिवर्सिटी वाले छात्रों को गिना जाता था, वहीं अब पूरी शिक्षा व्यवस्था को देखा जा रहा है. 

भारतीय छात्रों की संख्या 2025 में 18.8 लाख को पार

विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2025 तक दुनिया के 153 देशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की कुल संख्या 18.8 लाख से भी ज्यादा हो जाएगी. इनमें से 6.28 लाख स्कूली छात्र और 12.54 लाख उच्च शिक्षा यानी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में हैं. यह पहली बार है जब स्कूल स्तर के बच्चों को भी शामिल किया गया है, जिससे कुल संख्या अचानक बढ़ती हुई दिखाई देती है. 

2024 की तुलना में यूनिवर्सिटी छात्रों में गिरावट, लेकिन कुल संख्या बढ़ी

2024 में विदेश मंत्रालय ने 13.3 लाख यूनिवर्सिटी छात्रों के विदेश में होने की जानकारी दी थी. अब 2025 की रिपोर्ट बताती है कि यूनिवर्सिटी और उच्च शिक्षा में छात्रों की संख्या 12.54 लाख है यानी पिछले तीन साल की लगातार बढ़त के बाद पहली बार कमी दर्ज हुई. लेकिन कुल संख्या बढ़ी है क्योंकि स्कूलों के आंकड़े अब जोड़े गए हैं. 

भारतीय छात्रों के लिए टॉप तीन देश 

स्कूल और कॉलेज दोनों स्तर पर भारतीय छात्रों के लिए जिन तीन देशों में सबसे ज्यादा अट्रैक्ट है, वे कनाडा, 4,27,085 छात्र, अमेरिका 2,55,447 छात्र और संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई 2,53,832 छात्र है. इन देशों में भारतीय छात्रों की संख्या लगातार ज्यादा बनी हुई है. वहीं 2025 में यूनिवर्सिटी और कॉलेज शिक्षा के लिए भारतीय छात्रों की सबसे ज्यादा संख्या कनाडा 4,27,085, अमेरिका 2,55,247, यूनाइटेड किंगडम 1,73,190, ऑस्ट्रेलिया 1,38,579, जर्मनी 49,483, रूस 27,000, किर्गिस्तान 16,500 और जॉर्जिया 16,000 में है. ये देश खास तौर पर अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को अट्रैक्ट करते हैं. 

स्कूल-स्तर के नए डेटा ने बहुत कुछ बदल दिया है. खाड़ी देशों में बड़ी संख्या भारतीय प्रवासी परिवारों की है, जिनके बच्चे वहीं की स्कूलों में पढ़ते हैं. इसमें स्कूल छात्रों की संख्या यूएई 2,47,325, कतर 47,846, कुवैत 50,000, सऊदी अरब 75,000 और ओमान 44,547 है यानी कई खाड़ी देशों में भारतीय स्कूली बच्चे ही सबसे बड़ी छात्र आबादी बनाते हैं. 

हाई एजुकेशन में गिरावट क्यों आई?

2024 की तुलना में कॉलेज और यूनिवर्सिटी छात्रों की संख्या में आई गिरावट कई कारणों से जुड़ी है. जैसे भारत–कनाडा कूटनीतिक तनाव, वीजा प्रक्रिया धीमी हो गई. कई छात्रों का प्लान रुक गया. अमेरिका की नई चेकिंग और सख्ती, आव्रजन नियमों और दस्तावेजों में अतिरिक्त जांच, ब्रिटेन के कड़े स्टूडेंट वीजा और डिपेंडेंट नियम, खासकर मास्टर कोर्स की एंट्री प्रभावित और ऑस्ट्रेलिया में बढ़ी हुई वित्तीय जरूरते और मुश्किल वेरिफिकेशन, इन सबके बावजूद विदेशों में भारतीय छात्रों की कुल उपस्थिति अब भी बहुत ज्यादा है. 

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