उत्तर प्रदेश में सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है. राज्य सरकार ने यूपी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को पूरी तरह रद कर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस फैसले की जानकारी दी है. परीक्षा में गड़बड़ी और अवैध धन वसूली के संकेत मिलने के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाया है.
दरअसल, जांच एजेंसी एसटीएफ को परीक्षा से जुड़े मामले में गंभीर अनियमितताओं के सुराग मिले थे. जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ लोगों द्वारा अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उन्हें अनुचित लाभ दिलाने की कोशिश की जा रही थी. इस पूरे मामले की रिपोर्ट जब मुख्यमंत्री तक पहुंची, तो उन्होंने बिना देरी किए परीक्षा को रद करने का निर्देश दे दिया. सरकार का साफ कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की बेईमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिए गए हैं कि सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को दोबारा आयोजित किया जाए. नई परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और सख्त निगरानी में कराई जाएगी, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे.
जल्द आएंगी नई डेट्स
नई परीक्षा डेट्स को लेकर भी जल्द जानकारी दी जाएगी. आयोग को कहा गया है कि वह सभी जरूरी तैयारियां पूरी करने के बाद नई डेट की घोषणा करे. इस फैसले से जहां एक ओर अभ्यर्थियों को झटका लगा है, वहीं दूसरी ओर कई छात्रों ने सरकार के इस कदम का समर्थन भी किया है. उनका कहना है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई है, तो उसे रद करना ही सही फैसला है.
कब हुई थी परीक्षा?
यूपी सरकार ने 16 और 17 अप्रैल को असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा का आयोजन कराया था, जिसे रद्द कर दिया गया है. इस भर्ती परीक्षा के लिए करीब 1.14 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था. परीक्षा के तुरंत बाद कुछ केंद्रों से अनियमितताओं की शिकायतें मिलीं. इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई, जिसमें पेपर लीक और अवैध तरीके से उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के संकेत मिले. जिसके बाद इसे अब रद्द किया गया है.
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