अगर आप भी उत्तर प्रदेश की सरकारी नौकरी का सपना देख रहे हैं तो अब अलर्ट हो जाइए. उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की सबसे बड़ी परीक्षा प्रीलिमिनरी एलिजिबिलिटी टेस्ट (PET 2025) की तारीख नजदीक आ गई है. यह परीक्षा 6 और 7 सितंबर को आयोजित की जाएगी. पूरे प्रदेश के 48 जिलों में 1479 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. लाखों युवाओं के लिए यह परीक्षा उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है.
पीईटी परीक्षा क्यों होती है?
पीईटी यानी प्रीलिमिनरी एलिजिबिलिटी टेस्ट एक तरह की स्क्रीनिंग परीक्षा है. इसे पास करने के बाद अभ्यर्थी यूपी सरकार की विभिन्न ग्रुप सी नौकरियों के लिए आवेदन कर सकते हैं. यानी यह परीक्षा सरकारी नौकरी की पहली सीढ़ी है. इस बार आयोग ने साफ किया है कि पीईटी 2025 के जरिए कुल 5,833 पदों पर भर्ती की जाएगी. इसमें लोअर सबऑर्डिनेट, जूनियर असिस्टेंट, लेखपाल और फॉरेस्ट गार्ड जैसी नौकरियां शामिल हैं. यानी जिन उम्मीदवारों का सपना है कि वे सरकारी नौकरी पाएं, उनके लिए यह परीक्षा अनिवार्य है. इस परीक्षा का स्कोर आगे आने वाली भर्ती प्रक्रियाओं में भी काम आएगा.
रिकॉर्ड तोड़ आवेदन
इस बार पीईटी परीक्षा में युवाओं का उत्साह देखने लायक है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कुल 25.31 लाख अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है. हर परीक्षा पाली में लगभग 6 लाख छात्र शामिल होंगे. यह संख्या बताती है कि यूपी के युवाओं में सरकारी नौकरी पाने की चाहत कितनी अधिक है.
परीक्षा का पैटर्न
पीईटी 2025 में कुल 2 पेपर होंगे. पहला पेपर 6 सितंबर को और दूसरा पेपर 7 सितंबर को आयोजित होगा. दोनों दिन परीक्षा का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक तय किया गया है. परीक्षा OMR शीट पर होगी और इसमें कुल 100 ऑब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाएंगे. हर सही उत्तर पर 1 अंक मिलेगा जबकि गलत उत्तर पर 0.25 अंक काटे जाएंगे. यानी उम्मीदवारों को सवालों का जवाब सोच-समझकर देना होगा.
नकल रोकने के कड़े इंतजाम
इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा का आयोजन होना आसान नहीं है. परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और नकल-रहित बनाने के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं. परीक्षा केंद्रों पर कुल 32,259 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इन कैमरों से परीक्षा की लाइव मॉनिटरिंग होगी. सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 2,958 सेक्टर और स्टैटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है. इसके अलावा, 1.64 लाख से ज्यादा कर्मचारी परीक्षा के संचालन में लगाए जाएंगे. इन सख्त व्यवस्थाओं का मकसद है कि हर उम्मीदवार को समान अवसर मिले और परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे.
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