शरीर की बनावट को लेकर चिंता अब भारत के युवाओं में एक खतरनाक लेकिन कम पहचानी जाने वाली मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्या बनती जा रही है. यह परेशानी सिर्फ मोटापे से जूझ रहे युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कम वजन वाले युवा भी इसी तरह के मेंटल स्ट्रेस का सामना कर रहे हैं. AIIMS-ICMR की एक स्टडी में सामने आया है कि शरीर के वजन के दोनों छोर पर खड़े युवा बड़ी संख्या में शरीर की बनावट से जुड़ी मनोवैज्ञानिक परेशानी से प्रभावित हैं.
रिसर्च में क्या सामने आया?
जर्नल ऑफ एजुकेशन एंड हेल्थ प्रमोशन में पब्लिश रिसर्च में 18 से 30 साल के 1,071 युवाओं को शामिल किया गया. ये सभी AIIMS की ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे थे. रिसर्च के अनुसार, मोटापे से ग्रस्त 49 प्रतिशत और कम वजन वाले 47 प्रतिशत युवाओं ने मीडियम से गंभीर लेवल की बॉडी इमेज स्ट्रेस की बात कही. वहीं नाॅर्मल या ओवरवेट युवाओं में यह आंकड़ा करीब 36 प्रतिशत रहा. इस रिसर्च में शामिल युवाओं में करीब 25 प्रतिशत मोटापे और 11 प्रतिशत कम वजन की कैटेगरी में पाए गए. इनमें से ज्यादातर स्टूडेंट्स थे और मिडिल क्लास सैलरी वाली कैटेगरी से आते थे. आंकड़ों के अनुसार, कम वजन वाले युवा नॉर्मल वजन वालों की तुलना में लगभग दोगुना और मोटापे से ग्रस्त युवा करीब तीन गुना ज्यादा बॉडी इमेज एंग्जायटी का सामना कर रहे थे.
वजन मैनेज सिर्फ डाइट तक सीमित नहीं-एक्सपर्ट्स
इस रिसर्च से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि वजन से जुड़ी समस्याओं को केवल खानपान या एक्सरसाइज से नहीं हल किया जा सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार वजन मैनेजमेंट मेंटल हेल्थ से गहराई से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अगर इमोशनल प्रॉब्लम को नजरअंदाज किया जाए तो युवा बीच में ही लाइफस्टाइल प्रोग्राम छोड़ देते हैं. इस रिसर्च को लीड करने वाले एक्सपर्ट्स के अनुसार कई युवा वजन घटाने की शुरुआत तो पूरे जोश के साथ करते हैं, लेकिन पढ़ाई का दबाव, बॉडी इमेज से जुड़ा स्ट्रेस और मेंटल टायर्डनेस धीरे-धीरे उनके इंटरेस्ट को कम कर देती है. इससे देश की उस सोच पर सवाल खड़े होते हैं जो वजन मैनेजमेंट को सिर्फ कैलोरी गिनने तक सीमित रखती है.
वजन के हिसाब से बदला स्ट्रेस का रूप
इस रिसर्च में यह भी सामने आया कि मोटापे से जूझ रहे युवाओं में कॉन्फिडेंस की कमी और खुद को लेकर झिझक ज्यादा थी. वहीं कम वजन वाले युवाओं में स्ट्रेस, अकेलापन और शर्मिंदगी की भावना ज्यादा देखने को मिली. कुल मिलाकर आधे से ज्यादा युवा हर समय अपने वजन को लेकर सचेत रहते हैं, हर तीसरे का आत्मविश्वास प्रभावित होता है और हर चौथा खुद को जज किए जाने का एहसास करता है. रिसर्चर्स का कहना है कि समाज में फैले वजन को लेकर ताने, स्टिग्मा और अनरियलिस्टिक ब्यूटी स्टैंडर्ड इस मेंटल दबाव को और बढ़ा रहे हैं. इस रिसर्च में चेतावनी दी गई है कि भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति अभी भी मोटापे पर ज्यादा केंद्रित है, जबकि कम वजन वाले युवाओं की मेंटल प्रॉब्लम पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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