यमुना नदी की साफ सफाई को लेकर अब तक करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. केंद्र सरकार ने लोकसभा में यमुना नदी की साफ-सफाई को लेकर बड़ा खुलासा किया. एक लिखित जवाब में सरकार ने बताया कि यमुना नदी के संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और पुनरुद्धार के लिए अब तक कुल 1,951 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है.
जवाब में केंद्र सरकार ने कहा है कि यह खर्च विभिन्न केंद्रीय योजनाओं और राज्यों के सहयोग से किया गया है. सरकार ने कहा कि यह राशि मुख्य रूप से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के निर्माण, पुराने प्लांटों के उन्नयन, सीवरेज नेटवर्क विस्तार और प्रदूषण निगरानी जैसे कार्यों पर खर्च की गई है. यमुना से जुड़े राज्यों दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग परियोजनाओं के तहत यह फंड जारी किया गया.
परियोजनाओं में कई तरह के उपचार पर दिया गया ध्यान
लोकसभा को जानकारी दी गई जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत यमुना बेसिन में कई परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं. इनमें सीवेज शोधन क्षमता बढ़ाने, औद्योगिक अपशिष्ट पर नियंत्रण और नदी में गिरने वाले नालों के उपचार पर विशेष ध्यान दिया गया है. सरकार के मुताबिक, इन प्रयासों का उद्देश्य यमुना में बिना शोधन के गंदे पानी के प्रवाह को रोकना है.
केंद्र और राज्य के साथ स्थानीय निकायों की भी भूमिका अहम
सरकार ने यह भी साफ किया है कि यमुना की सफाई एक निरंतर और दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ स्थानीय निकायों की भूमिका अहम है. नदी के जल की गुणवत्ता पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि सुधार की स्थिति का आकलन किया जा सके.
हालांकि, सरकार ने माना है कि यमुना की स्थिति में अपेक्षित सुधार के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है. आने वाले समय में नई परियोजनाओं, बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन और राज्यों के बीच समन्वय को और मजबूत करने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि यमुना को स्वच्छ और अविरल बनाया जा सके.
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