Wednesday, April 8, 2026
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मुर्शिदाबाद, मालदा, नदिया में सबसे ज्यादा कटे वोटर्स के नाम, जानें जिलेवार वोटर्स कटौती का पूरा हिसाब


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच चुनाव आयोग ने एक चौंकाने वाला डेटा जारी किया है. राज्य में चलाए गए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान के बाद करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. आयोग ने अभी आधिकारिक तौर पर नए वोटर बेस का ऐलान तो नहीं किया है, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के कुल वोटरों में से लगभग 11.85 प्रतिशत की कटौती की गई है. इस बड़े बदलाव ने राज्य की सियासी हलचल को और तेज कर दिया है.

91 लाख नाम हटने का पूरा गणित
चुनाव आयोग के डेटा के अनुसार, पिछले साल अक्टूबर तक बंगाल में 7.66 करोड़ मतदाता थे. जांच प्रक्रिया के बाद अब तक कुल 90.83 लाख नामों को हटाया जा चुका है. इनमें से करीब 27.16 लाख नाम तो अकेले न्यायिक अधिकारियों की उस जांच (Adjudication) के दौरान कटे, जिसमें 60.06 लाख वोटरों की पात्रता पर सवाल उठे थे. यानी जांच के दायरे में आए करीब 45 प्रतिशत लोग वोट डालने के लिए अयोग्य पाए गए.

मुस्लिम बाहुल्य और सीमावर्ती जिलों में भारी कटौती
आंकड़ों में सबसे बड़ी कटौती मुस्लिम बाहुल्य जिले मुर्शिदाबाद में देखी गई है, जहां जांच के दायरे में आए 11 लाख लोगों में से 4.55 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए गए. इसी तरह बांग्लादेश की सीमा से सटे उत्तर 24 परगना में 3.25 लाख और मालदा में 2.39 लाख नाम काटे गए हैं. दक्षिण 24 परगना में भी करीब 2.23 लाख वोटरों की छुट्टी कर दी गई है.

नदिया और मतुआ बाहुल्य इलाकों का हाल
प्रतिशत के हिसाब से देखें तो नदिया और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में स्थिति और भी चौंकाने वाली है. नदिया जिले में जांच के दायरे में आए नामों में से रिकॉर्ड 77.86 प्रतिशत और उत्तर 24 परगना में 55.08 प्रतिशत नाम हटाए गए हैं. बता दें कि ये इलाके हिंदू ‘नमोशूद्र मतुआ’ समुदाय के प्रभाव वाले माने जाते हैं.

ममता बनर्जी के गढ़ कोलकाता में क्या हुआ?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर वाले ‘कोलकाता दक्षिण’ इलाके में भी करीब 28,000 वोटरों के नाम काटे गए हैं. वहीं ‘कोलकाता उत्तर’ में स्थिति ज्यादा गंभीर दिखी, जहाँ जांच के दायरे में आए 64 प्रतिशत यानी करीब 39,000 लोगों को वोटिंग के लिए अयोग्य पाया गया.

पहले चरण के लिए वोटर लिस्ट ‘फ्रीज’
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत की गई है. सोमवार आधी रात के बाद पहले चरण (23 अप्रैल) की 152 सीटों के लिए वोटर लिस्ट को ‘फ्रीज’ कर दिया गया है, यानी अब इसमें कोई नया नाम नहीं जोड़ा जाएगा. दूसरे चरण की 142 सीटों के लिए लिस्ट 9 अप्रैल को लॉक कर दी जाएगी.



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