Saturday, March 7, 2026
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बाजार में गिरावट के समय कैसे करें निवेश? SIP और Lump Sum में क्या है सही विकल्प, जानें डिटेल


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SIP vs Lump sum Investment: शेयर बाजार में गिरावट आने पर कई निवेशक इसे निवेश का मौका मानते हैं और कम कीमत पर पैसा लगाने की योजना बनाते हैं. ऐसे समय में अक्सर यह सवाल उठता है कि म्यूचुअल फंड में एकमुश्त निवेश करना बेहतर रहेगा या सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए धीरे-धीरे पैसा लगाना सही होगा.

दरअसल दोनों तरीकों के अपने फायदे हैं. एकमुश्त निवेश में पूरी रकम एक साथ लगाई जाती है, जबकि SIP में तय अंतराल पर छोटी-छोटी राशि निवेश की जाती है. आइए जानते हैं, इस बारे में…

एकमुश्त और SIP निवेश में क्या अंतर है?

बाजार में गिरावट को कई बार विशेषज्ञ निवेश का अच्छा मौका मानते हैं, लेकिन यह कहना मुश्किल होता है कि यह गिरावट कितने समय तक जारी रहेगी. ऐसे में निवेश के दो आम तरीके सामने आते हैं. एकमुश्त निवेश और एसआईपी.

एकमुश्त निवेश में निवेशक पूरी रकम एक ही बार में लगा देता है, जबकि SIP में हर महीने एक तय राशि धीरे-धीरे निवेश की जाती है.

बाजार में गिरावट के समय एसआईपी है सही

जब भी बाजार में गिरावट आती है तो, निवेशकों के मन में यह सवाल आता है कि एकमुश्त पैसे लगाए जाएं या एसआईपी के जरिए निवेश को जारी रखा जाए. इस विषय में मार्केट के जानकारों का कहना है कि, गिरते बाजार में एसआईपी एक बेहतर विकल्प हो सकता है.

इसके पीछे की वजह यह है कि गिरते बाजार में एकमुश्त निवेश की वैल्यू कम हो सकती है. जिससे रिकवरी करने में समय लगता है. वहीं एसआईपी के जरिए निवेश से पर्चेच प्राइस एवरेज रहती है.  

इसे एक उदाहरण से समझते हैं, अगर कोई व्यक्ति एसआईपी के जरिए 6 मार्च को निवेश करता है और उस वक्त निफ्टी 24,500 रुपये पर थी. अगले महीने सेम तारीख को निफ्टी में गिरावट होती है और उस वक्त निफ्टी 24,000 के लेवल पर ट्रेड कर रही है तो निवेशक को पहले से ज्यादा यूनिट्स एलॉट होंगे. निवेशकों को इसके विपरीत रिजल्ट भी मिल सकता है.

दोनों तरीकों को मिलाकर भी कर सकते हैं निवेश

कुछ निवेशक ऐसे भी होते हैं जिनके पास एकमुश्त निवेश करने के लिए पैसा होता है, लेकिन वे पूरी रकम एक ही बार में लगाने से बचते हैं. ऐसे निवेशक आमतौर पर थोड़ी राशि एक साथ निवेश कर देते हैं और बाकी पैसे को एसआईपी के जरिए हर महीने धीरे-धीरे लगाते हैं.

इस तरीके से उन्हें कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिल सकता है. हालांकि जानकारों का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहा है, तो वह अपनी सुविधा और रणनीति के अनुसार इन दोनों में से किसी एक तरीके को भी चुन सकता है.

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

यह भी पढ़ें: डिजिटल फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों को राहत देने की तैयारी, पीड़ित ग्राहकों को मिल सकता है मुआवजा; जानें RBI का प्रस्ताव



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