पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के बढ़ते राजनयिक और सैन्य रिश्ते का स्वागत किया है. इसको लेकर बकायदा वहां के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने बयान जारी किया है. उसने ढाका और इस्लामाबाद के बीच बढ़ी नजदीकी की बधाई दी है. कसूरी ने इस्लामाबाद और ढाका के बीच बढ़ते संबंधों पर बधाई दी है. साथ ही पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बिजनेस शुरू होने को लेकर सराहनीय और प्रशंसनीय कदम बताया है.
CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कसूरी का समर्थन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. उसके संदेश ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के जुड़ाव को मुस्लिम दुनिया के लिए एक सकारात्मक पुनर्गठन के तौर पर पेश किया है. यह LeT का भारत के विरोध में लंबे समय से चल रहे वैचारिक नैरेटिव को दिखाता है.
बारीकी से नजर रखे हुए हैं आतंकी समूह
सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान के आतंकी ग्रुप क्षेत्रीय डिप्लोमेटिक अवसरों को ऑपरेशनल अवसरों को रूप में देख रहे हैं. यह दक्षिण एशिया में जिहादी प्रभाव का विस्तार करने के लिए किया जा रहा है. पूरे इलाके में गहरे लॉजिस्टिकल, भर्ती और वैचारिक नेटवर्क होने का अनुमान है. बांग्लादेश पहले भी पाकिस्तान चरमपंथी समूहों से जुड़े आतंकी फंडिंग और ट्रांजिट जांच में शामिल रहा है. इससे मौजूदा चिंताएं बढ़ गई हैं.
जिहादी ग्रुप्स क्षेत्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों पर बारीकी से रखे हुए नजर
इससे जाहिर होता है कि कैसे जिहादी ग्रुप्स क्षेत्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखते हैं. पाकिस्तान में सरकारों और सैन्य प्रतिष्ठानों को प्रभावित करने और कुछ मामलों में शर्तें तय करने की कोशिश करते हैं.
हाल ही में कसूरी ने खुले तौर पर शेखी बघारी है कि सेना उसे अपने सैनिकों के अंतिम संस्कार में बुलाती है. साथ ही उसने दावा किया था कि भारत उसकी मौजूदगी से डरता है. उसने कहा था कि पाकिस्तान की सेना मुझे अंतिम संस्कार में नमाज पढ़ने बुलाती है. क्या आप जानते हैं, भारत मुझसे डरता है?


