Tuesday, March 10, 2026
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नए सिरे से शुरुआत की उम्मीद, वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज ने MBBS कोर्स के लिए किया आवेदन


श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज एक बार फिर चर्चा में है. संस्थान ने अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए MBBS कोर्स शुरू करने की अनुमति मांगते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को दोबारा आवेदन भेजा है. संस्थान के अधिकारियों के अनुसार सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यह आवेदन किया गया है. इसके तहत निरीक्षण और अन्य प्रक्रियाओं के लिए करीब 10 लाख रुपये की फीस भी जमा कर दी गई है. अब संस्थान को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में NMC की टीम निरीक्षण के बाद इस पर फैसला लेगी.

रिपोर्ट्स के अनुसार इस साल 7 जनवरी को NMC ने इस मेडिकल संस्थान में MBBS कोर्स चलाने की अनुमति वापस ले ली थी. इसके कुछ ही घंटों बाद कॉलेज प्रशासन ने वहां पढ़ रहे छात्रों को घर लौटने के लिए कह दिया था. इस फैसले के बाद छात्रों और उनके परिवारों में काफी चिंता का माहौल बन गया था. कई छात्रों ने कहा था कि उन्हें अचानक कॉलेज छोड़ने के लिए कहा गया, जिससे उनकी पढ़ाई को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी.

पहले बैच में 50 छात्र थे

इस मेडिकल कॉलेज में MBBS का पहला बैच शुरू किया गया था, जिसमें कुल 50 छात्रों को दाखिला मिला था. बाद में जब अनुमति रद्द हुई तो इन छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए दूसरे कॉलेजों में भेज दिया गया. जम्मू-कश्मीर के सात नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इन छात्रों को समायोजित किया गया. इनमें से 22 छात्रों को कश्मीर घाटी के तीन मेडिकल कॉलेजों में और बाकी छात्रों को जम्मू क्षेत्र के चार कॉलेजों में स्थान दिया गया, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो.

विरोध प्रदर्शन के बीच आया था फैसला

उस समय यह मामला काफी विवादों में भी रहा था. कुछ संगठनों के समूह श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्रों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था. समिति का कहना था कि यह संस्थान माता वैष्णो देवी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए दान से बनाया गया है, इसलिए यहां पढ़ने वाले छात्रों को लेकर कुछ शर्तें होनी चाहिए. विरोध के दौरान यह भी चर्चा में आया कि कॉलेज के पहले बैच में शामिल 50 छात्रों में से 44 छात्र मुस्लिम समुदाय से थे. हालांकि कई छात्रों का कहना था कि NMC के फैसले का संबंध इन विरोध प्रदर्शनों से जोड़ा जा रहा है.

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NMC ने बताई थीं कमियां

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने जब कॉलेज की अनुमति वापस ली थी, तब उसने अपने आदेश में कहा था कि संस्थान में कुछ महत्वपूर्ण कमियां हैं. इन कमियों में इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों की संख्या और अस्पताल में मरीजों की उपलब्धता जैसे मुद्दे शामिल बताए गए थे. हालांकि संस्थान के अधिकारियों ने इन आरोपों को पूरी तरह सही नहीं माना था. उनका कहना था कि कॉलेज में सुविधाएं मौजूद हैं और समय के साथ उन्हें और बेहतर बनाया जा रहा है.

अब सुविधाओं को किया जा रहा मजबूत

संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि अब पहले से ज्यादा तैयारियां की जा रही हैं, ताकि अगली बार निरीक्षण में किसी तरह की कमी न रह जाए. इसके लिए नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल को भी इस मेडिकल संस्थान से जोड़ा जा रहा है. बताया जा रहा है कि अस्पताल के प्रबंधन को संस्थान के अधीन लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. 1 अप्रैल से इस अस्पताल के सभी डॉक्टर और कर्मचारी मेडिकल इंस्टीट्यूट के साथ काम करेंगे. इससे अस्पताल में मरीजों की संख्या और चिकित्सा सुविधाएं दोनों बढ़ेंगी.

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