दिल्ली में कड़ाके की ठंड ने बेघरों की जान पर आफत बना दी है. पिछले 15 दिनों में ठंड से 44 बेघरों की मौत हो चुकी है, जो बेहद चिंताजनक है. एबीपी न्यूज की टीम ने दिल्ली के कई रैन बसेरों का जायजा लिया. पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि ये रैन बसेरे नशेड़ियों और चोरों के अड्डे बन गए हैं.
गरीब और जरूरतमंद बेघर लोग चाकू, ब्लेड, लूटपाट और मारपीट के डर से इनमें रुकने से कतराते हैं. नतीजा ये कि कई लोग खुले आसमान के नीचे ही रात बिताने को मजबूर हैं. एबीपी न्यूज से खास बातचीत में समाजसेवी भावेश पिपलिया ने ये गंभीर जानकारी साझा की.
उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 15 दिनों में ठंड से 44 लोगों की मौत हुई है. ये मौतें सरकारी लापरवाही की पोल खोल रही हैं.
निजामुद्दीन फ्लाईओवर के नीचे बने रैन बसेरे में रह रही महिलाओं ने बताया कि खाने के अंदर छिपकली मिलती है, बाल निकलते हैं, खाना सही से नहीं मिलता है. यहां अपने बाल बच्चे लेकर मजबूरी में रह रहे हैं मजबूरी में इसलिए रह रहे हैं कि बाहर ठंड लग जाए बच्चों को बीमार ना पड़ जाए इसलिए रहना पड़ रहा है, यहां पर हर जगह से हवा निकलती है ठंडी बारिश होता है तो ऊपर से टप टप पानी गिरता है सारे कंबल भीग जाते हैं यहां पर एक टाइम सिर्फ सफाई होती है वह भी सिर्फ झाड़ू, यहां पर सफाई नहीं होती है हमें अपने हाथ से सफाई करनी पड़ती है.
मजबूरी में सोना पड़ता है बाहर
आधे से ज्यादा लोग बाहर सो रहे हैं साफ सफाई नहीं होती है खाना पीना टाइम से नहीं मिलता है पानी वाली चाय मिलती है. हम डर कैसे ले रहे थे क्योंकि यहां पर चाकू बाजी होती है किसी के जेब काटी जाती है किसी के पैसे चोरी होते हैं किसी का फोन चोरी होता है यहां तक की कंबल चोरी हो जाते हैं इसलिए मजबूरी में कई लोगों को बाहर सोना पड़ता है, चोरी चकारी के चक्कर में हमारे पति या डर की वजह से नहीं सोते, डर रहता है किसी के ब्लेड मारा जाता है किसी के चक्कू मारा जाता है और गार्ड नहीं होता यहां पर.
यहां महिलाओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं है, ना यहां बिजली है ना पानी है. रात में हमारे टेंट में एक आदमी घुस रहा था तो हमने गार्ड को बोला फिर उसने टेंट बंद किया गार्ड रात को आकर सो जाता है और सुबह चला जाता है. रेखा गुप्ता को यहां आके देखना चाहिए.
रैन बसेरे छोड़कर बाहर सो रहे लोग
जो आदमी रैन बसेरे को छोड़ कर बाहर सो रहे है उन्होंने एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए बताया कि वहां तो दारु बाज नशेड़ी आते है इसलिए मैं रैन बसेरा में बिल्कुल अंदर नहीं जाऊंगा, बाहर सो जाऊंगा लेकिन अंदर नहीं जाऊंगा. मैं अंदर गया हूं लेकिन सोया नहीं चाकू, ब्लेड चोरी चकारी होती है. हम दो पैसे कमा कर आते है चाकू मार देते है. सेफ्टी होगी तो जरूर जाएंगे. कोई ब्लेड मार दे तो क्या होगा.
लोधी रोड स्थित रैन बसेरा के रह रहे लोगों ने बताया कि जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम रेड लाइट के पास जो रेन बसेरा है उसमें 45 साल और 50 साल की महिलाओं का सामान फेंका गया उसको मारा गया और उसको करने वाली लेडिस थी उनको मारा क्यों गया अभी तक यह नहीं पता वह डर के मारे बात नहीं रही हैं.
लोगों ने गुस्से में कहा कि आप बताओ इसके अंदर कुछ दिख रहा है जो सरकार दावा कर रही है आपको इसके अंदर कुछ ऐसा दिख रहा है जो सरकार कह रही है जो सरकार ने छाप दिया. एक बुजर ने कहा कि हम रैन बसेरा में नहीं सोते हैं जो हम 10 रुपये कमाते हैं वह भी चोरी हो जाते हैं, एक अंजलि नाम की महिला ने बताया कि सरकार ने जो यह तमाम ट्रेन बसेरा के बाहर प्रचार किया हुआ है ऐसा कुछ भी नहीं है और कंबल भी साफ सुथरा नहीं है कंबल हम खुद अपने उड़ाते हैं कंबल गंदे हैं.
टॉयलेट में नहीं आता पानी
इसके साथ ही जो अन्य पुरुष वहां पर खड़े थे उन्होंने बताया कि यहां पर पानी नहीं आता है शौचालय गंदे हैं और ना यहां पर दवाइयां मिलती हैं ना यहां पर लाइट है और ना ही यहां पर डॉक्टर आते हैं. जो मिल रहा है उसी में हम खुश हैं अब हम बोले भी तो किसको बोले. जो सरकार ने प्रचार में दिखा रखा है पानी की बिजली कि यह सारी सुविधाएं नहीं है. जो सरकार ने कंबल दिए हैं जब से हम आए हैं तब से धुले तक नहीं है ना ही गद्दे धुले हैं.
‘लोगों को शेल्टर होम में रहने के लिए कर रहे कन्वेंस’
रैन बसेरों में कितनी भी समस्या है उसको कैसे ठीक किया जा सकता है और दिल्ली में कड़ाके की सर्दी के कितने लोगों की जान गई है इस एबीपी न्यूज़ ने बात की समाजसेवी भावेश पिपलिया से जो रैन बसेरे और बेघर लोगों के लिए पिछले कई सालों से काम कर रहे है. उन्होंने एबीपी न्यूज़ को बताया कि सरकार को कन्वेंस करना चाहिए ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा शेल्टर में पहुंचे, शेल्टर होम में की जगह सड़क पर सोने का एक रीजन यह भी है कि लोगों को सड़क पर कंबल और बाकी चीज अच्छी मिलती है सड़क पर जो लोग आते हैं सड़क पर सो रहे होते हैं उनको कंबल और खाना दिया जाता है.
भावेश ने कहा कि अभी दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के माने तो अभी दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर 71 रिफ्लेक्ट हो रहा है इसमें से 44 ऐसे हैं जिसमें किसी के प्रकार की चोट का निशानी है यानी इसका मतलब यह है कि 44 ऐसे लोग हैं जिनकी ठंड के कारण मौत हुई है सरकार के लिए यह सिर्फ आंकड़े हैं, सरकार के नाकामी का परिणाम है. इतना पैसा खर्च करने के बाद भी इतनी मौत हो रही है तो यह शर्मनाक है.
यह पिक्चर जहां तक मुझे लग रहा है यह जेनरेटेड हो सकता है वास्तविक से यह तालमेल नहीं खाता है, हम इसके लिए लगातार आवाज उठाते हैं ठंड इतनी है 44 मोटे हो चुकी है इसलिए महीने 2 तारीख को यह आदेश दे दिया गया था कि हीटर का इस्तेमाल नहीं करेंगे लेकिन सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए कि लोगों को सुविधा कैसे मिले. और हम अब सरकार के सामने यह बात जरूर लेंगे क्योंकि सरकार ने जिनके लिए रैन बसेरा बनाए है अगर वो रैन बसेरा में नहीं आ रहे है तो सरकार को इस पर कम करना चाहिए.


