
डेबिट-क्रेडिट कार्ड टैप टू पे स्कैम
Tap-To-Pay Fraud: अगर आपको क्रेडिट या डेबिट कार्ड से खरीदारी करना पसंद है, तो यहां एक ऐसी बात है जिस पर आपको ध्यान देना चाहिए। दुनिया भर में एक नया डिजिटल पेमेंट स्कैम सामने आया है, जिसे ‘घोस्ट टैपिंग’ या टैप टू पे स्कैम कहा जाता है और यह कई देशों में भीड़भाड़ वाली जगहों पर तेजी से बढ़ रहा है। यह नया डिजिटल पेमेंट स्कैम डेबिट या क्रेडिट कार्ड और स्मार्टफोन पर टैप-टू-पे (एनएफसी) टेक्नीक का दुरुपयोग कर रहा है। जैसे-जैसे कॉन्टैक्टलेस पेमेंट का चलन बढ़ता जा रहा है, स्कैमर्स ने इसका फायदा उठाने का एक तरीका खोज निकाला है। फ्रॉडस्टर्स मुख्य रूप से यात्रियों को निशाना बना रहे हैं और हवाई अड्डों, त्योहारों और बिजी बाजारों जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाकों में उनके खाते से पैसे चुराने की कोशिश कर रहे हैं।
‘घोस्ट टैपिंग’ क्या है?
घोस्ट टैपिंग एक ऐसी प्रोसेस है जिसमें धोखेबाज NFC-इनेबिल्ड डिवाइस का इस्तेमाल करके चुपचाप कॉन्टैक्टलेस पेमेंट कर देते हैं, जबकि विक्टम को इसकी जानकारी नहीं होती या भनक तक नहीं लगती। फिलहाल कई रिपोर्टों में इस नए स्कैमिंग ट्रेंड का जिक्र है, जिसमें स्कैमर्स को कार्ड की जानकारी या OTP की जरूरत नहीं होती। अगर आपके क्रेडिट कार्ड या फोन में टैप-टू-पे की सुविधा है, तो स्कैमर्स आपके पास खड़े होकर भी इसी तरह की वायरलेस तकनीक का इस्तेमाल करके पेमेंट डेटा कैप्चर कर सकते हैं या ट्रांजैक्शन शुरू कर सकते हैं।
अगर आपकी जेब में टैप टू पे फैसिलिटी वाला डेबिट या क्रेडिट कार्ड पड़ा है तो इसके जरिए स्कैम होने का खतरा बना रहता है। स्कैमर्स पॉइंट ऑन सेल यानी (POS) मशीन का इस्तेमाल करते हैं और इसमें अपनी तरह से एक कॉमन रकम डाल देते हैं। इसके बाद भीड़भाड़ वाली जगह जैसे शॉपिंग मॉल, दुकान आदि की भीड़ मे लग जाते हैं और पीओएस मशीन को लोगों की जेब पर छूते हैं। जिनकी जेब में टैप टू पे वाला कार्ड पड़ा होता है तो उनके कार्ड से पीओएस मशीन के छूते ही पीड़ित के खाते से रकम कट जाती है और उन्हें पता भी नहीं चल पाता है। स्कैमर्स इस धोखाधड़ी को बड़ी चालाकी से अंजाम दे रहे हैं ताकि पीड़ित को इसका पता भी न चले।
धोखाधड़ी कैसे काम करती है?
- घोस्ट टैपिंग नियर फील्ड कम्युनिकेशन (एनएफसी) तकनीक पर आधारित है ये वही एडवांस्ड टेक्नीक है जो कॉन्टैक्टलेस कार्ड, एप्पल पे, गूगल पे और सैमसंग वॉलेट में इस्तेमाल हो रही है।
- धोखेबाज पोर्टेबल एनएफसी रीडर या मॉडिफाइड स्मार्टफोन लेकर चलते हैं
- वे भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों, हवाई अड्डों या किसी भी कार्यक्रम में अपने शिकार के साथ रहते हैं
- नकली विक्रेता आपसे छोटी-मोटी खरीदारी के लिए ‘टैप टू पे’ करने को कह सकते हैं
- पीड़ितों से दिखाई गई रकम से ज्यादा चार्ज लिया जा सकता है, या बिना सूचना दिए ही चार्ज लिया जा सकता है
- एक बात जिस पर ध्यान देना चाहिए वह यह है कि ट्रांजेक्शन पूरा करने के लिए स्कैमर्स अक्सर पीड़ित के पास थोड़ी देर रुकने की मांग करते हैं
इस घोस्ट टैपिंग स्कैम से कैसे बचें
टैप टू पे सर्विस बंद कर दें और इसके लिए अपनी बैंकिंग ऐप का सहारा लीजिए और उसमें कार्ड परमिशन वाले सेगमेंट में जाकर इस सर्विस को बंद कर दें। इसके लिए NFC पेमेंट को बंद करना होगा और ये ज्यादातर डेबिट-क्रेडिट कार्ड में होती है जिसे कार्ड के बैंक वाली मोबाइल ऐप से बंद कर सकते हैं।
टैप टू पे के जरिए होने वाले पेमेंट की लिमिट सेट करें जिससे फ्रॉड होने पर भी ज्यादा घाटा ना हो जैसे कि एक हजार रुपये से भी कम की लिमिट सेट कर सकते हैं।
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