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ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच विवाद का फायदा डेनिश पीएम मेट फ्रेडरिक्सन को मिला है। अमेरिकी वेबसाइट द पोलिटिको ने लिखा है कि फ्रेडरिक्सन को राष्ट्रपति ट्रम्प को शुक्रिया कहना चाहिए क्योंकि उन्होंने उन्हें गहराते राजनीतिक संकट से बाहर निकाल लिया है। फ्रेडरिकसन की पार्टी के पॉपुलैरिटी में काफी उछाल आया है। सर्वे में सोशल डेमोक्रेट्स को सिर्फ 32 सीटें मिलती दिख रही थीं। यानी एक ही महीने में पार्टी की स्थिति में करीब 9 सीटों का उछाल आया है। पिछले साल नवंबर 2025 में सोशल डेमोक्रेट पार्टी लोकल चुनाव हार गई थी। सबसे बड़ा झटका कोपेनहेगन में लगा, जहां पार्टी ने 100 साल में पहली बार सत्ता गंवा दी। स्थिति तब बदलनी शुरू हुई, जब ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को डेनमार्क से छीनकर अपने में मिलाने की धमकी दी। इसके जवाब में डेनमार्क की प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन ने खुलकर देश की संप्रभुता का बचाव किया। गठबंधन की सरकार चला रहीं फ्रेडरिक्सन डेनमार्क में संसद में कुल 179 सीटें हैं, इनमें से प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन की सोशल डेमोक्रेट्स के पास 50 सीटें हैं। सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रेट पार्टी इस समय देश में गठबंधन सरकार चला रही है। इस गठबंधन में दो सेंटर-राइट पार्टियां मॉर्डरेटर्स और वेनस्टर भी शामिल हैं। मेगाफॉन नाम की एक डेनिश कंसल्टेंसी के सर्वे में सोशल डेमोक्रेट पार्टी को 22.7% वोट और संसद की 41 सीटें मिलीं। यह सर्वे 20 से 22 जनवरी के बीच किया गया। दिसंबर में हुए सर्वे में फ्रेडरिकसन की पार्टी को सिर्फ 32 सीटें मिलती दिखाई गई थीं। ताजा सर्वे दिखाते हैं कि 41 सीटों के साथ भी वे संसद की सबसे बड़ी पार्टी बनी रहेंगी। इससे वे फिर से गठबंधन सरकार बनाने की बातचीत में सबसे मजबूत स्थिति में आ जाएंगी, हालांकि सत्ता में बने रहने के लिए उन्हें सहयोगी दलों पर निर्भर रहना पड़ेगा। 100 साल में पहली बार राजधानी में हारी पार्टी समर्थन में आई यह बढ़त इसलिए और भी खास मानी जा रही है, क्योंकि नवंबर में हुए नगर निगम चुनावों में सोशल डेमोक्रेट्स को करारी हार मिली थी। इस चुनाव में पार्टी ने कोपेनहेगन गंवा दिया था, जो बेहद अहम सीट थी और जिसे पार्टी ने पिछले 100 सालों में कभी नहीं खोया था। डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन के नेतृत्व वाली मॉडरेट्स पार्टी ने इस सर्वे में अपना वोट शेयर लगभग तीन गुना कर लिया। पार्टी का वोट 2.2% से बढ़कर 6.4% हो गया। यह करीब 12 सीटों के बराबर है। वहीं एक और एजेंसी वॉक्समीटर के सोमवार को जारी सर्वे में फ्रेडरिकसन की कैबिनेट को 40.9% समर्थन मिला, जो दो साल में सबसे ऊंचा स्तर है। अगर आज चुनाव होते हैं तो गठबंधन के 73 सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया है। ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दी, बाद में पलटे जनवरी की शुरुआत में ट्रम्प ने कहा था कि वे किसी भी तरीके से ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेंगे। ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त इलाका है। ट्रम्प इस पर कब्जा करने की धमकी पहले भी दी जाती रही थी, लेकिन वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद यह और गंभीर लगने लगी। 2019 से सत्ता में रहीं फ्रेडरिकसन ने ग्रीनलैंड के लिए जोरदार तरीके से कूटनीतिक बचाव किया और इस मामले पर पूरे यूरोपीय देशों को एकजुट किया। ट्रम्प को कहना पड़ा कि वे ग्रीनलैंड पर जबरदस्ती कब्जा नहीं करेंगे। इसका फायदा यह हुआ कि डेनमार्क के लोग PM के साथ खड़े हो गए हैं। यूरोप से जुड़े पॉलिटिकल मामलों की एक्सपर्ट ऐन रासमुसेन ने पोलिटिको से कहा- आखिरी बार डेनमार्क में सरकार के साथ इतनी एकजुटता कोविड महामारी के दौरान देखने को मिली थी। राष्ट्रीय संकट अक्सर ऐसा होता है। लोग सत्ता में बैठी सरकार के समर्थक बन जाते हैं। पीएम को मिल सकता है चुनावी फायदा डेनमार्क के चुनावी कानून के मुताबिक 1 नवंबर 2026 से पहले देश में चुनाव कराना जरूरी है। अब माना जा रहा है कि फ्रेडरिकसन अपनी राजनीतिक बढ़त को भुनाने के लिए जल्दी चुनाव कराएंगी। फ्रेडरिकसन पहले भी जल्दी चुनाव का जोखिम उठा चुकी हैं। 2022 में गिरते समर्थन के बीच उन्होंने अचानक चुनाव कराए थे और जीत हासिल की थी। रासमुसेन ने कहा कि देश में कुछ ही महीने बाद चुनाव हो जाएंगे, इसकी संभावना ज्यादा है। जानवर को मारने का आदेश, लोगों की नजर में बुरी बनीं PM फ्रेडरिकसन एक प्रभावशाली नेता मानी जाती हैं। हालांकि कई गलत फैसले लेने की वजह से देश में उनकी लोकप्रियता में जबरदस्त गिरावट आई। जैसे कोरोना फैलने से रोकने के लिए उन्होंने 1.7 करोड़ फर वाले जानवर (मिंक) को मारने का आदेश दिया था। दरअसल तब वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि मिंक की वजह से देशभर में कोरोना फैल सकता है। हालांकि कुछ दिन बाद कोर्ट ने इसे गलत बताया। मिंक की महंगी खाल से किसानों को फायदा होता था, जिससे करोड़ों का फर बिजनेस चलता था और हजारों लोगों की रोजी जुड़ी हुई थी। 1.7 करोड़ मिंक के मार दिए जाने से पीएम की लोकप्रियता में जबरदस्त गिरावट आई। 2020 में यूगॉव सर्वे में फ्रेडरिकसन की लोकप्रियता 79% से गिरकर सिर्फ 34% रह गई थी। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में वामपंथी पार्टियां फायदे में रिपोर्ट के मुताबिक यह रुझान सिर्फ डेनमार्क तक सीमित नहीं है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भी जहां-जहां नेताओं ने ट्रम्प का खुलकर विरोध किया है, वहां उन्हें चुनावी फायदा मिला है। कनाडा में कंजरवेटिव पार्टी चुनाव जीतती हुई दिख रही थी। तमाम सर्वे में पियरे पोइलिव्रे को अगला पीएम माना जा रहा था। लेकिन तभी अमेरिका में ट्रम्प दोबारा चुनाव जीत गए। उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की धमकी दी। इसका फायदा यह हुआ कि लिबरल पार्टी को चुनाव में जीत मिल गई और मार्क कार्नी पीएम बन गए। जबकि कुछ महीने पहले तक लिबरल पार्टी की स्थिति बहुत खराब थी। जस्टिन ट्रूडो को पीएम पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था। दरअसल कंजरवेटिव पार्टी को ट्रम्प के करीब माना जाने लगा और यह धारणा बनी कि वे अमेरिका के सामने सख्ती नहीं दिखा पाएंगे। दूसरी ओर, लिबरल पार्टी ने खुद को कनाडा की आजादी और आत्मसम्मान की रक्षा करने वाली पार्टी के रूप में पेश किया। ऑस्ट्रेलिया में भी एक समय ऐसा लग रहा था कि कंजरवेटिव (राइट-विंग) पार्टियां चुनाव में बढ़त बनाए हुए हैं और मौजूदा सरकार मुश्किल में है। लेकिन अब कई सर्वे में एंथनी अल्बनीज की पार्टी को बढ़त मिलती दिख रही है। ———— यह खबर भी पढ़ें… NATO बोला-अमेरिका के बिना यूरोप अपनी रक्षा नहीं कर सकता:यूरोपीय नेता बस सपने देख रहे, अगर अकेले चलना है तो डिफेंस बजट बढ़ाएं NATO के महासचिव मार्क रुट ने सोमवार को ब्रुसेल्स में यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि यूरोप अमेरिका के बिना खुद की रक्षा नहीं कर सकता। पढ़ें पूरी खबर…
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ग्रीनलैंड पर ट्रम्प की धमकी का डेनमार्क PM को फायदा:अमेरिकी राष्ट्रपति को चैलेंज किया था, अब सर्वे में पार्टी को 9 सीटों का फायदा
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