Friday, January 16, 2026
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क्या 3 लाख रुपये किलो हो जाएगी चांदी, जानें कब तक छुएगी यह मुकाम?


पिछले कुछ महीनों से अगर आपने सोना और चांदी की कीमतों पर नजर रखी है, तो यह साफ दिखता है कि ये कीमती धातुएं लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं. कभी थोड़ी गिरावट तो कभी जबरदस्त उछाल, लेकिन कुल मिलाकर रुझान तेजी का ही रहा है. खासतौर पर चांदी ने तो निवेशकों और आम लोगों दोनों को चौंका दिया है.

हाल ही में दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में ऐसा उछाल देखने को मिला, जिसने बाजार में हलचल मचा दी. महज एक दिन में चांदी 15,000 रुपये महंगी होकर 2,65,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या चांदी वाकई 3 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है. एक्सपर्ट्स की मानें तो आने वाले कुछ दिनों में चांदी की कीमत के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं. 

चांदी की कीमत में अचानक इतनी तेजी क्यों?

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक, चांदी की कीमतों में करीब 6 प्रतिशत का उछाल आया है. पिछले कारोबारी दिन चांदी जहां 2,50,000 रुपये प्रति किलो थी, वहीं अब यह सीधे 2,65,000 रुपये तक पहुंच गई है. इसी तरह, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने में भी करीब 2,900 रुपये की बढ़त दर्ज की गई. लेमन मार्केट्स के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,600 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच चुका है. वहीं चांदी 84 से 90 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार कर रही है. इसका मतलब साफ है कि दुनियाभर के निवेशक जोखिम भरे माहौल में सेफ हेवन यानी सुरक्षित निवेश के रूप में सोना-चांदी की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. 

चांदी को 3 लाख के पार ले जाने वाले बड़े कारण

1. अमेरिका के महंगाई के आंकड़े – अमेरिका में दिसंबर की महंगाई दर 2.7 प्रतिशत रही है. इससे उम्मीद बढ़ गई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Fed) ब्याज दरों में कटौती कर सकता है.  ब्याज दर घटने पर सोना-चांदी आमतौर पर महंगे होते हैं. 

2. फेड और डोनाल्ड ट्रंप के बीच टकराव – डोनाल्ड ट्रंप और फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. अगर ट्रंप की पसंद का नया फेड चेयरमैन आता है और ब्याज दरें घटती हैं, तो चांदी की कीमतों को और सपोर्ट मिल सकता है.

3. ट्रंप टैरिफ पर कोर्ट का फैसला – 15 जनवरी को अमेरिकी कोर्ट में ट्रंप के टैरिफ से जुड़े मामले पर फैसला आ सकता है. अनिश्चितता बढ़ने से निवेशक सोना-चांदी में पैसा लगा रहे हैं. 

4. जियो-पॉलिटिकल टेंशन – ईरान, रूस, वेनेजुएला, क्यूबा और कंबोडिया जैसे देशों के साथ अमेरिका के तनाव ने बाजार में डर का माहौल बना दिया है. ऐसे हालात में चांदी को सुरक्षित निवेश माना जा रहा है. 

5. चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड – सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है. रिसर्च के मुताबिक, 2027 तक सोलर इंडस्ट्री को मौजूदा सप्लाई का 20 प्रतिशत से ज्यादा चांदी चाहिए होगी. 2050 तक चांदी के 85–98 प्रतिशत ग्लोबल भंडार का इस्तेमाल हो सकता है. 

6. रुपये की कमजोरी – डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है. साल 2025 में रुपया 5 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है. चांदी इंपोर्ट होती है, इसलिए रुपये की कमजोरी से कीमतें और बढ़ जाती हैं. 

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